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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Dalai Lama in Ladakh: spirtual leader Dalai Lama visit to Ladakh religious no one should be bothered by this said Government officials

Dalai Lama in Ladakh: धर्मगुरु दलाई लामा धार्मिक यात्रा पर पहुंचे लद्दाख, अनुयायियों में जबरदस्त उत्साह

Fri, 15 Jul 2022 01:12 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/लेह Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Fri, 15 Jul 2022 01:12 PM IST
सार

धर्मगुरु दलाई लामा के लद्दाख दौरे को लेकर दिल्ली में सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि यह उनकी धार्मिक यात्रा है। इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। दलाई लामा को अपने बीच पाकर अनुयायियों में जबरदस्त उत्साह रहा।

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Dalai Lama in Ladakh: spirtual leader Dalai Lama visit to Ladakh religious no one should be bothered by this said Government officials
दलाई लामा - फोटो : ट्विटर

विस्तार

वर्ष 2018 में जन्मदिन मनाने के चार साल बाद लद्दाख में प्रवास के लिए पहुंचे तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का शुक्रवार को अनुयायियों ने भव्य स्वागत किया। लेह एयरपोर्ट से लेकर पूरे रास्ते लोग उनके स्वागत में खड़े नजर आए। एयरपोर्ट पहुंचने पर पारंपरिक लोक नृत्य से लोगों ने अगवानी की। इस बीच दिल्ली में सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि यह उनकी धार्मिक यात्रा है। इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। दलाई लामा को अपने बीच पाकर अनुयायियों में जबरदस्त उत्साह रहा।

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जोरदार स्वागत से अभिभूत तिब्बती धर्मगुरु

भारी सुरक्षा के बीच उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। इस बीच अपने जोरदार स्वागत से अभिभूत तिब्बती धर्मगुरु ने कहा कि दोबारा लद्दाख आने का मौका मिलने से प्रसन्नता है। यहां के लोगों के हृदय से स्वागत करने के प्रति वे आभार जताते हैं। कहा कि लोगों ने जिस प्रकार से मित्रता और आत्मीयता का परिचय दिया है उसके लिए वे तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हैं। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि यह पहली बार नहीं है कि दलाई लामा सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं।

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धर्मगुरु की लद्दाख यात्रा पूरी तरह से धार्मिक

वह पहले भी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश का दौरा कर चुके हैं। दलाई लामा एक आध्यात्मिक नेता हैं और उनकी लद्दाख यात्रा पूरी तरह से धार्मिक है। उनके दौरे पर किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए। ज्ञात हो कि दलाई लामा ने 2018 में लद्दाख में अपना जन्मदिन मनाया था। उस दौरान भी चीन की तरफ  से भारत के प्रति प्रतिक्रिया आई थी। इसी सप्ताह जब दलाई लामा के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी थी तो भी चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी।

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तिब्बत से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा था कि भारत को चीन के आंतरिक मामलों में दखल देने से परहेज करते हुए तिब्बत से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। वहीं भारत ने चीन की आलोचना को खारिज करते हुए कहा था कि दलाई लामा देश के सम्मानित अतिथि हैं। दलाई लामा 1959 में तिब्बत से पलायन के बाद से भारत में रह रहे हैं।

कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद पहली यात्रा

कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद दलाई लामा की धर्मशाला से बाहर यह पहली यात्रा है। उन्होंने खुद को मैक्लोडगंज स्थित आवास में एकांतवास में रखा था। इस दौरान उनका किसी से भी मिलना जुलना नहीं हुआ। दुनिया भर के अनुयायियों से वह वर्चुअल माध्यम से रूबरू होते रहे। वीरवार को लद्दाख जाने के क्रम में वे धर्मशाला से जम्मू पहुंचे थे।

तिब्बती बौद्ध संस्कृति के संरक्षण की मांग कर रहे

यहां उन्होंने कहा कि उनकी मांग चीन के भीतर सार्थक स्वायत्तता और तिब्बती बौद्ध संस्कृति को संरक्षित करने की है। चीन में रहने वाले आम लोग नहीं बल्कि कुछ कट्टरपंथी उन्हें अलगाववादी मानते हैं। चीन में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जिन्हें यह अहसास है कि वह स्वतंत्रता की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि सार्थक स्वायत्तता और तिब्बती बौद्ध संस्कृति के संरक्षण की मांग कर रहे हैं।

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