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कबायली हमलों के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
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कबायली हमलों के शहीदों को याद करने पर किताब का विमोचन करते हुए डॉ प्रीति भगत सहित अन्य
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आरएस पुरा। 22 अक्टूबर 1947 में कबायली हमलों के शहीदों को शनिवार को श्रद्धांजलि दी गई। पीओजेके डिस्प्लेस पीपल्स फ्रं ट की तरफ से गांव बासपुर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए और शहीद हुए पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. प्रीति भगत द्वारा पीओजेके परिवारों पर आधारित लिखी पुस्तक काफिला का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के दौरान कबायली हमलों का सामना करने वाले लोगों व उनके परिजनों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विशेष तौर पर पहुंचे रिफ्यूजी नेता कामरेड ओमप्रकाश खजूरिया, डॉ. पदम देव रैना आदि ने विचार रखे। कहा कि आज के दिन को काला दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। आज के दिन 1947 में कबायली द्वारा किए हमले हमारे के बुजुर्गों सहित बच्चे तक मारे गए और लाखों की संख्या में बेघर हो गए थे। उन्होंने कहा कि आजादी के कई वर्ष बीत जाने के बावजूद भी परिवार अपने हकों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं और संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में शरणार्थी परिवारों ने अपने घर से मुट्ठी-मुट्ठी चावल लाए, जिसका भंडारा आयोजित किया गया। इन परिवारों को बताने का प्रयास किया गया कि हमारे पूर्वजों ने किस तरह से सब कुछ छोड़ कव्वालियों का सामना करते हुए अपना परिवार व पूरी जिंदगी की कमाई खोई थी। इस मौके पर देसराज चौधरी, विनोद कुमार, रीना चौधरी, रमेश बिल्ला सहित कई अन्य लोगों ने भी विचार रखे।
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कार्यक्रम के दौरान डॉ. प्रीति भगत द्वारा पीओजेके परिवारों पर आधारित लिखी पुस्तक काफिला का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के दौरान कबायली हमलों का सामना करने वाले लोगों व उनके परिजनों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विशेष तौर पर पहुंचे रिफ्यूजी नेता कामरेड ओमप्रकाश खजूरिया, डॉ. पदम देव रैना आदि ने विचार रखे। कहा कि आज के दिन को काला दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। आज के दिन 1947 में कबायली द्वारा किए हमले हमारे के बुजुर्गों सहित बच्चे तक मारे गए और लाखों की संख्या में बेघर हो गए थे। उन्होंने कहा कि आजादी के कई वर्ष बीत जाने के बावजूद भी परिवार अपने हकों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं और संघर्ष कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में शरणार्थी परिवारों ने अपने घर से मुट्ठी-मुट्ठी चावल लाए, जिसका भंडारा आयोजित किया गया। इन परिवारों को बताने का प्रयास किया गया कि हमारे पूर्वजों ने किस तरह से सब कुछ छोड़ कव्वालियों का सामना करते हुए अपना परिवार व पूरी जिंदगी की कमाई खोई थी। इस मौके पर देसराज चौधरी, विनोद कुमार, रीना चौधरी, रमेश बिल्ला सहित कई अन्य लोगों ने भी विचार रखे।
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