ये क्या हो रहा मंदिरों के शहर में नारी शक्ति के साथ
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मंदिरों के शहर में बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं रह हैं। महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और अपहरण के मामलों में तीन गुना बढ़ोतरी होना इसका प्रमाण है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि छेड़छाड़ के मामलों में अधिकतर आरोपी सबूतों के अभाव में रिहा हो गए।
सबूतों के अभाव के साथ बयान देने वालों का अभाव और इन मामलों को की लचर जांच भी बड़े कारण हैं। हालांकि, दुष्कर्म होने के मामलों में कमी आई है। शहर में वाहनों की चोरी, नशा तस्करी के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
वर्ष 2015 में सितंबर तक महिलाओं से छेड़छाड़ के 89 मामले दर्ज हुए हैं। 2014 में यह आंकड़ा 63 था। 2014 में अपहरण के मामले 67 थे, जो 2015 में 171 हो गए।
इन मामलों में अधिकतर नाबालिग और छात्राएं शामिल हैं, जिनको स्कूल जाते वक्त या तो अपहरण कर लिया गया या फिर छेड़छाड़ की गई। दुष्कर्म के मामलों में कमी आई है।
2015 में 41 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 2014 में 53 मामले दर्ज हुए थे। 2015 में छेड़छाड़ के 27 मामले दर्ज हुए, 2014 में 45 मामले दर्ज हुए थे।
नशा तस्करी भी चरम पर
नशा तस्करी के 2015 में 71 मामले दर्ज किए गए। 2014 में 37 मामले दर्ज किए गए थे। पंजाब और हिमाचल प्रदेश से नशे के तस्करी की जा रही है।
इस तस्करी में नशीले कैप्सूल, हेरोइन, गांजा, अफीम, कोकेन, ब्राउन शुगर और नशीले इंजेक्शन शामिल हैं। नशा तस्करी में एक महिला के पकड़े जाने का मामला भी दर्ज है।
देसी शराब का धंधा भी बढ़ा है। 2015 में 81 मामले दर्ज हो चुके हैं। 2014 में 41 मामले दर्ज हुए थे। पुलिस के लिए यह राहत की बात रही है कि हत्याओं और हत्या करने के प्रयास कम हुए है।
सितंबर 2015 तक हत्या के 16 मामले दर्ज किए गए, जबकि सितंबर तक 2014 में 19 मामले दर्ज किए गए थे। ऐसे ही 2015 में हत्या के प्रयास में 68 मामले दर्ज हुए, जो 2014 में 65 थे।
जानलेवा हमला करने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। 2015 में 18 मामले दर्ज हुए हैं। 2014 में 11 मामले दर्ज हुए थे। आर्म एक्ट के मामले भी कम हुए हैं। 2015 में 8 मामले दर्ज हुए हैं, जो 2014 में 21 थे। सड़क हादसों में इस साल 1015 मामले दर्ज हुए, 2014 में 1070 मामले दर्ज हुए थे।