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जेल में पाक कैदी की हत्या का आरोपी कोर्ट से बरी

Fri, 30 Jan 2015 07:38 PM IST
Updated Fri, 30 Jan 2015 07:38 PM IST
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prosecution failure leads to acquittal in pak prisoner's murder case

पाकिस्तानी कैदी की हत्या करने के आरोप में ट्रायल का सामना कर रहे आरोपी विनोद कुमार को अभियोजन की विफलता पर प्रिंसिपल सेशन जज आरएस जैन की अदालत ने आरोपों से बरी कर दिया।

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जम्मू के कोट भलवाल जेल में एक अन्य मामले में कोर्ट मार्शल के तहत उम्रकैद की सजा भुगत रहे कैदी विनोद कुमार ने तीन मई 2013 की सुबह सवा आठ बजे पाक कैदी सनाउल्लाह के सिर पर गैंती से हमला कर दिया था।
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घायल पाक कैदी की हालत बिगड़ने पर पहले उसे लुधियाना के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। वहां से उसे चंडीगढ़ पीजीआई शिफ्ट किया गया, जहां नौ मई 2013 को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने विनोद कुमार के खिलाफ आरपीसी की धारा 302, 201 के तहत केस दर्ज किया। हालांकि आरोपी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया और ट्रायल का सामना करने का दावा किया।
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सुनवाई के दौरान प्रिंसिपल सेशन जज आरएस जैन ने पाया कि एपीपी के अनुसार अभियोजन ने अपना केस पूरी तरह साबित कर दिया है। अभियोजन की ओर से गवाहों से पूछताछ से साबित होता है कि आरोपी ने पाक कैदी पर हमला किया, जिसके कारण उसकी मौत हुई।

अभियोजन आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा

prosecution failure leads to acquittal in pak prisoner's murder case

हालांकि आरोपी के वकील सन्नी खन्ना का कहना था कि अभियोजन की ओर से गवाहों से पूछताछ के आधार पर दर्ज बयान यह साबित करने में असफल रहे कि आरोपी ने सनाउल्लाह खान की हत्या की। किसी भी गवाह ने यह नहीं कहा कि उन्होंने आरोपी को पाक कैदी पर हमला करते देखा। साथ ही सबूतों में कहीं भी यह साबित नहीं हो रहा कि आरोपी ने घटना को अंजाम दिया।

प्रिंसिपल सेशन जज ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपी के वकील के तर्क में दम है और उस पर विचार करना चाहिए। साथ ही केस के दौरान अभियोजन द्वारा की गई पूछताछ का रिकार्ड भी रखा। किसी भी आरोपी ने यह स्वीकार नहीं किया कि उन्होंने विनोद को सनाउल्ला पर गैंती से हमला करते देखा।

बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि अभियोजन ने केस के जांच अधिकारी से पूछताछ करने में भी विफल रहा, जो आरोपी के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने माना कि अभियोजन आरोप साबित करने में विफल रहा है और ऐसे में आरोपी को बरी किया जाता है।

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