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पेशावर हमला दे गया पीटीएसडी, पढ़ें खबर

Tue, 16 Dec 2014 10:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 16 Dec 2014 10:55 PM IST
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Post-traumatic stress disorder problem in jammu children
भले ही हजारों मील दूर पेशावर के आर्मी स्कूल पर आतंकी हमला हुआ है। लेकिन देश के अधिकांश अभिभावकों को यह हमला पोस्ट ट्रामेटिक स्ट्रेस डिसआर्डर (पीटीएसडी) दे गया है। मनोचिकित्सकों की मानें तो दुनिया में अपनी तरह के स्कूली बच्चों पर हुए इस आतंकी हमले से अभिभावकों में अपने लाडलों की सुरक्षा को लेकर बेचैनी बढ़ गई है।
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टीवी चैनलों से इस हमले को देख रहे बच्चों में भी खौफ और डर पैदा हो गया है। इस हमले ने बिना सुरक्षा और साफ्ट टारगेट में चल रहे स्कूलों की सुरक्षा को बढ़ावा देने पर भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।
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रियासत के सरकारी और निजी स्कूलों में रोजाना लाखों बच्चे पढ़ाई के लिए जाते हैं। इसमें आतंकग्रस्त और सीमा से बिल्कुल सटे इलाकों में भी ऐसे सैकड़ों स्कूल हैं। लेकिन पेशावर हमले में बड़ी तादाद में स्कूली बच्चों को निशाना बनाने से अभिभावकों के साथ बच्चों में पीटीएसडी की शिकायत बढ़ेगी।
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साइक्रेटरी अस्पताल जम्मू में कार्यरत मनोचिकित्सक डा. मनु अरोड़ा का कहना है कि स्कूली बच्चों को निशाना बनाकर इतने बड़े आतंकी हमले को दुनियाभर ने पहली बार देखा है। इस हमले से अभिभावकों के साथ बच्चों की शारीरिक और मानसिक स्तर पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

बच्चे स्कूल में किसी अजनबी के आ जाने पर उसे खौफ की नजरों से देखेंगे। कई बच्चों में स्कूल जाने को लेकर डर बैठ जाएगा तो कई तनाव का शिकार हो जाएंगे। अभिभावक भी लाडलों को स्कूल छोड़ने और ले आने तक की सुरक्षा को लेकर बार बार सोचेंगे।

बच्चों के भी दिलो दिमाग में ऐसी घटना महीनों तक बनी रहेगी। इस हमले ने पुरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है, लिहाजा पहले ही अशांत चल रहे जम्मू-कश्मीर में आतंकी स्कूली बच्चों को साफ्ट टारगेट बनाकर बड़ी वारदात को अंजाम देने की सोच सकते हैं।


कैसे लें इलाज--
ऐसी घटनाओं से पीड़ित लोगों को काउंसिलिंग दी जाती है। इसमें साइकोथेरेपी का भी सहारा लिया जा सकता है। इसके अलावा पारिवारिक काउंसिलिंग करवाना भी जरूरी है। पीड़ित के सामने बीती बातों को न दोहराया जाए। उसे हर तरह से अच्छा माहौल देने की कोशिश की जाए। उन्हें मानसिक स्तर पर मजबूत बनाकर आत्मविश्वास बढ़ाया जाए।
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