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चर्चित शेर मोहम्मद मर्डर केस में हिजबुल आतंकी को जमानत नहीं
जेएनएफ/जम्मू
Updated Wed, 17 May 2017 11:27 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : Demo Pic.
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हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को चंगा गांव के सरपंच शेर मोहम्मद मर्डर के चर्चित मामले में हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी तारिक मट्टू की जमानत अर्जी खारिज कर दी। केस में ट्रायल कोर्ट ने उम्र कैद के साथ ही पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी।
डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस आलोक आराधे के साथ ही जस्टिस जनक राज कोतवाल शामिल थे, ने अभियुक्त की तरफ से एडवोकेट रोजिना अफजल और स्टेट की तरफ से सीनियर एएजी सीमा शेखर को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
पुलिस के मुताबिक मामला चार जुलाई, 2002 का है। सुबह तकरीबन साढ़े नौ बजे पुलिस स्टेशन गंदोह को सूचना मिली कि आतंकी अरफान अली, जान मोहम्मद और अभियुक्त तारिक मट्टू शेर मोहम्मद के घर में घुसे हैं। उनकी गोली से शेर मोहम्मद की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आतंकियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए उसके घर के पास एक आईईडी रख दी।
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इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस स्टेशन गंदोह में धारा 302 समेत अन्य धाराओं में एफआईआर हुई थी। कोर्ट ने पाया कि एक जुलाई, 2014 को इसी कोर्ट की डिवीजन बेंच जमानत आवेदन को खारिज कर चुकी है। इस कोर्ट के पास भी मामले को अलग से देखने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस आलोक आराधे के साथ ही जस्टिस जनक राज कोतवाल शामिल थे, ने अभियुक्त की तरफ से एडवोकेट रोजिना अफजल और स्टेट की तरफ से सीनियर एएजी सीमा शेखर को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
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पुलिस के मुताबिक मामला चार जुलाई, 2002 का है। सुबह तकरीबन साढ़े नौ बजे पुलिस स्टेशन गंदोह को सूचना मिली कि आतंकी अरफान अली, जान मोहम्मद और अभियुक्त तारिक मट्टू शेर मोहम्मद के घर में घुसे हैं। उनकी गोली से शेर मोहम्मद की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आतंकियों ने सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए उसके घर के पास एक आईईडी रख दी।
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इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस स्टेशन गंदोह में धारा 302 समेत अन्य धाराओं में एफआईआर हुई थी। कोर्ट ने पाया कि एक जुलाई, 2014 को इसी कोर्ट की डिवीजन बेंच जमानत आवेदन को खारिज कर चुकी है। इस कोर्ट के पास भी मामले को अलग से देखने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।