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चार हजार लाइसेंस बनाए गए
Updated Wed, 05 Dec 2018 01:43 AM IST
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जम्मू। सीबीआई केस और गन लाइसेंस जारी करने पर प्रतिबंध के बाद भी पुरानी तारीख पर करीब चार हजार गन लाइसेंस जारी कर दिए गए। गन डीलर, फैक्ट्री मालिकों और जिला अधिकारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से गन लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। राज्यपाल प्रशासन में भी कई जिलाधीश गन लाइसेंस जारी करने का गोरखधंधा कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार फर्जी गन लाइसेंस जारी करने के मामले में सुर्खी में रहे जम्मू कश्मीर से मई महीने से रामबन व गांदरबल जिलों से गन लाइसेंस जारी किए गए। सभी लाइसेंस सेना के जवानों के नाम से जारी हुए, जिनकी ड्यूटी जम्मू कश्मीर के किसी भी जिले में नहीं रही। हालांकि इससे पहले भी जम्मू कश्मीर से फर्जी गन लाइसेंस जारी करने का भंडाफोड़ हुआ था। भंडाफोड़ होने के दौरान एक चर्चित व्यक्ति को राजस्थान पुलिस ने गुरूग्राम से पकड़ा था। राजस्थान पुलिस ने आपरेशन जुबैदा चलाया कई फर्जी मोहरें और दस्तावेज जब्त किए। हालांकि गन लाइसेंस जारी करने के लिए आनलाइन फार्म भरने का नया प्रावधान तैयार किया गया था।
नए प्रावधानों की भी उड़ रहीं धज्जियां
नए प्रावधान की भी गन लाइसेंस बनाने वाले रैकेट ने धज्जियां उड़ा दीं। लाइसेंस बनाने के मामले में रियासत से अन्य कई राज्यों तक जाल फैला हुआ हैै। सूत्रों के अनुसार नवंबर माह में ही रामबन से 1500, बांडीपोरा से 2500 और शोपियां से 1000 लाइसेंस जारी किए गए। इससे पहले भी कश्मीर के एक जिले से अगस्त माह में एक साथ 4000 लाइसेंस जारी कर दिए गए। हालांकि इसकी संख्या अधिक होने की भी पुष्टि की जा रही है।
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बीस हजार में बन रहे हैं लाइसेंस
गन लाइसेंस जारी करने के लिए गन डीलर बीस हजार रुपये प्रति लाइसेंस ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि पैसे लेने के बाद डीलर अपनी ही दुकान से सेना के जवानों को गन बेच रहे हैं। एक गन की कीमत आठ से दस हजार रुपये है। उसे भी 25 हजार तक में बेचा जा रहा है। गन और लाइसेंस देने के लिए करीब 50 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
सीबीआई की जांच ठंडी पड़ी
फर्जी गन लाइसेंस मामले में चंडीगढ़ में दर्ज आरसी चार, छह और सात का भी अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। सीबीआई ने केवल गन लाइसेंसों की जांच करने के बाद सेना के हेडक्वार्टर को पत्र लिखकर अपनी औपचारिकताएं पूरी की हैं। सीबीआई की टीम सितंबर महीने में जम्मू आई और केवल पूर्व डीसी राजीव रंजन से ही पूछताछ की और वापस लौट गई। राजस्थान, जम्मू कश्मीर सरकार की सिफारिश के बाद केस को सीबीआई को दिया गया।
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सूत्रों के अनुसार फर्जी गन लाइसेंस जारी करने के मामले में सुर्खी में रहे जम्मू कश्मीर से मई महीने से रामबन व गांदरबल जिलों से गन लाइसेंस जारी किए गए। सभी लाइसेंस सेना के जवानों के नाम से जारी हुए, जिनकी ड्यूटी जम्मू कश्मीर के किसी भी जिले में नहीं रही। हालांकि इससे पहले भी जम्मू कश्मीर से फर्जी गन लाइसेंस जारी करने का भंडाफोड़ हुआ था। भंडाफोड़ होने के दौरान एक चर्चित व्यक्ति को राजस्थान पुलिस ने गुरूग्राम से पकड़ा था। राजस्थान पुलिस ने आपरेशन जुबैदा चलाया कई फर्जी मोहरें और दस्तावेज जब्त किए। हालांकि गन लाइसेंस जारी करने के लिए आनलाइन फार्म भरने का नया प्रावधान तैयार किया गया था।
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नए प्रावधानों की भी उड़ रहीं धज्जियां
नए प्रावधान की भी गन लाइसेंस बनाने वाले रैकेट ने धज्जियां उड़ा दीं। लाइसेंस बनाने के मामले में रियासत से अन्य कई राज्यों तक जाल फैला हुआ हैै। सूत्रों के अनुसार नवंबर माह में ही रामबन से 1500, बांडीपोरा से 2500 और शोपियां से 1000 लाइसेंस जारी किए गए। इससे पहले भी कश्मीर के एक जिले से अगस्त माह में एक साथ 4000 लाइसेंस जारी कर दिए गए। हालांकि इसकी संख्या अधिक होने की भी पुष्टि की जा रही है।
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बीस हजार में बन रहे हैं लाइसेंस
गन लाइसेंस जारी करने के लिए गन डीलर बीस हजार रुपये प्रति लाइसेंस ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि पैसे लेने के बाद डीलर अपनी ही दुकान से सेना के जवानों को गन बेच रहे हैं। एक गन की कीमत आठ से दस हजार रुपये है। उसे भी 25 हजार तक में बेचा जा रहा है। गन और लाइसेंस देने के लिए करीब 50 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
सीबीआई की जांच ठंडी पड़ी
फर्जी गन लाइसेंस मामले में चंडीगढ़ में दर्ज आरसी चार, छह और सात का भी अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। सीबीआई ने केवल गन लाइसेंसों की जांच करने के बाद सेना के हेडक्वार्टर को पत्र लिखकर अपनी औपचारिकताएं पूरी की हैं। सीबीआई की टीम सितंबर महीने में जम्मू आई और केवल पूर्व डीसी राजीव रंजन से ही पूछताछ की और वापस लौट गई। राजस्थान, जम्मू कश्मीर सरकार की सिफारिश के बाद केस को सीबीआई को दिया गया।