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पिता की हत्या करने वाले बेटे को उम्रकैद की सजा
Updated Sat, 28 Jul 2018 01:52 AM IST
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जम्मू। पिता की हत्या मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी बेटे को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कार्यकारी चीफ जस्टिस आलोक अराध्ये और जस्टिस एमके हंजूरा वाली खंडपीठ ने शुक्रवार को मामले पर सुनवाई की। आरोपी यशपाल ने पिता मोतीराम की संपत्ति में हिस्से के लिए हत्या कर दी थी।
जजों की खंडपीठ ने महसूस किया कि आरोपी का जुर्म माफ करने वाला नहीं। उसने एक सोची समझी साजिश के तहत पिता की हत्या की। जजों ने मामले में अब्राहम कोले की एक कविता का भी जिक्र किया। कविता में कहा गया है कि मानव के अंदर कई तरह के जानवर छुपे हैं। उसके अंदर एक चापलूस कुत्ता, दहाड़ने वाला शेर, चालाक लोमड़ी, लूटने वाला भेड़िया, धोखेबाज मगरमच्छ और लालची चील छुपी है। इन दलीलों को सुनने के बाद आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई।
बिलावार के उच्चापिंड के रहने वाले मोतीराम की 15 जनवरी 2004 को हत्या की गई थी। उसी दिन रात को मोतीलाल के भाई प्रीतम चंद ने घर पहुंचने पर देखा कि वह घर पर नहीं है। उसने अपनी मां से भाई के बारे पूछा। मां ने बताया कि यशपाल उसे जबरदस्ती घर से बाहर ले गया था। प्रीतम जब भाई को ढूंढने निकला तो देखा कि यशपाल ने मोतीलाल को पकड़ रखा है। उसके सिर पर पत्थर से मारा गया था। यशपाल जोर-जोर से बोल रहा था कि जो भी उसके सामने आएगा, उसको जान से मार देगा। प्रीतम के चिल्लाने पर वहां बिशन दास, प्रकाश और फकर अली पहुंचे। पिता के सिर पर वार कर यशपाल वहां से भाग गया, जिससे उनकी मौत हो गई। जेएनएफ
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जजों की खंडपीठ ने महसूस किया कि आरोपी का जुर्म माफ करने वाला नहीं। उसने एक सोची समझी साजिश के तहत पिता की हत्या की। जजों ने मामले में अब्राहम कोले की एक कविता का भी जिक्र किया। कविता में कहा गया है कि मानव के अंदर कई तरह के जानवर छुपे हैं। उसके अंदर एक चापलूस कुत्ता, दहाड़ने वाला शेर, चालाक लोमड़ी, लूटने वाला भेड़िया, धोखेबाज मगरमच्छ और लालची चील छुपी है। इन दलीलों को सुनने के बाद आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई।
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बिलावार के उच्चापिंड के रहने वाले मोतीराम की 15 जनवरी 2004 को हत्या की गई थी। उसी दिन रात को मोतीलाल के भाई प्रीतम चंद ने घर पहुंचने पर देखा कि वह घर पर नहीं है। उसने अपनी मां से भाई के बारे पूछा। मां ने बताया कि यशपाल उसे जबरदस्ती घर से बाहर ले गया था। प्रीतम जब भाई को ढूंढने निकला तो देखा कि यशपाल ने मोतीलाल को पकड़ रखा है। उसके सिर पर पत्थर से मारा गया था। यशपाल जोर-जोर से बोल रहा था कि जो भी उसके सामने आएगा, उसको जान से मार देगा। प्रीतम के चिल्लाने पर वहां बिशन दास, प्रकाश और फकर अली पहुंचे। पिता के सिर पर वार कर यशपाल वहां से भाग गया, जिससे उनकी मौत हो गई। जेएनएफ
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