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अगर यह गोलीबारी रात को होती तो हमारे परिवार के किसी सदस्य की जान चली जाती
Updated Thu, 13 Dec 2018 02:11 AM IST
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पुंछ। पाकिस्तानी सेना ने बुधवार को जो गोलीबारी दिन के समय की है अगर वह रात को होती तो हमारे परिवार के किसी सदस्य की जान भी जा सकती थी। कई सदस्य घायल हो सकते थे। क्योंकि पाकिस्तान सेना की तरफ दागी गई दो गोलियां हमारे जिस बेड पर गिरी है हम लोग रात को वहीं सोते हैं।
यह बात अमर उजाला को अपने बिस्तर पर पड़ी गोलियां दिखाते हुए जिले के गांव करमाड़ा निवासी मारूफ अहमद ने बताई। उन्होंने कहा कि जिन दिनों नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी होती रहती है अथवा हालात खराब रहते हैं उन दिनों तो हम लोग सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं लेकिन तीन चार माह से नियंत्रण रेखा पर हालात सामान्य होने के कारण हम लोग आराम से सोते हैं। बुधवार को सुबह भी हम इसी पलंग से सो कर उठे थे। यह तो खुदा का शुक्र है कि जिस समय यह गोलियां हमारे घर में आ लगीं उस समय बिस्तर पर कोई नहीं था। बच्चे स्कूलों में थे और महिलाएं रसोई में काम कर रही थीं।
मारूफ अहमद का कहना है कि हमारा मकान नियंत्रण रेखा पर लगी फेंसिंग से करीब एक किलोमीटर पीछे है। जहां पाक सेना की गोलीबारी के दौरान कभी कभार ही मोर्टार आदि आकर आसपास के क्षेत्रों में गिरते हैं लेकिन छोटी गोलियां यहां तक आने की संभावना काफी कम रहती है। ऐसे में इस गोलीबारी से साफतौर पर साबित होता है कि पाकिस्तानी सेना ने जानबूझ कर हमारे गांव के घरों को निशाना बनाकर गोलियां दागी हैं। पाकिस्तानी सेना की तो मंशा गांव में जानी नुकसान करने की थी। खुदा ने हम सब पर रहम कर दिया और किसी प्रकार कोई जानी नुकसान भी नहीं हुआ और न ही कोई घायल हुआ है।
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यह बात अमर उजाला को अपने बिस्तर पर पड़ी गोलियां दिखाते हुए जिले के गांव करमाड़ा निवासी मारूफ अहमद ने बताई। उन्होंने कहा कि जिन दिनों नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी होती रहती है अथवा हालात खराब रहते हैं उन दिनों तो हम लोग सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं लेकिन तीन चार माह से नियंत्रण रेखा पर हालात सामान्य होने के कारण हम लोग आराम से सोते हैं। बुधवार को सुबह भी हम इसी पलंग से सो कर उठे थे। यह तो खुदा का शुक्र है कि जिस समय यह गोलियां हमारे घर में आ लगीं उस समय बिस्तर पर कोई नहीं था। बच्चे स्कूलों में थे और महिलाएं रसोई में काम कर रही थीं।
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मारूफ अहमद का कहना है कि हमारा मकान नियंत्रण रेखा पर लगी फेंसिंग से करीब एक किलोमीटर पीछे है। जहां पाक सेना की गोलीबारी के दौरान कभी कभार ही मोर्टार आदि आकर आसपास के क्षेत्रों में गिरते हैं लेकिन छोटी गोलियां यहां तक आने की संभावना काफी कम रहती है। ऐसे में इस गोलीबारी से साफतौर पर साबित होता है कि पाकिस्तानी सेना ने जानबूझ कर हमारे गांव के घरों को निशाना बनाकर गोलियां दागी हैं। पाकिस्तानी सेना की तो मंशा गांव में जानी नुकसान करने की थी। खुदा ने हम सब पर रहम कर दिया और किसी प्रकार कोई जानी नुकसान भी नहीं हुआ और न ही कोई घायल हुआ है।
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