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ग्रामीणो की सुझबुझ ने बचाई कई मासुम जिंदगीयां।
Updated Tue, 27 Mar 2018 10:27 AM IST
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पौनी। वीरवार सुबह लेतर में हुई मिनी बस दुर्घटना के बाद उसमें सवार मासूमों को बचाने के लिए ग्रामीणों की सूझबूझ काम आई। ग्रामीणों की सूझबूझ के कारण ही मिनी बस में फंसे विद्यार्थियाें को ज्यादा चोटें नहीं आईं, हालांकि बाद में एक विद्यार्थी की जान चले जाने का पता चलने के बाद ग्रामीणों को दुख भी हुआ।
बताया जाता है कि जैसे ही विद्यार्थियाें से भरी मिनी बस सड़क छोड़ कर के खाई की तरफ लुढ़की वैसे ही उसमें सवार विद्यार्थियाें में चीख पुकार मच गई। मौके पर अन्य वाहन में बैठे लोगाें के साथ ही ग्रामीण भी काफी संख्या में पहुंच गए। मौके पर पहुंचे ग्रामीण अपने साथ लोहा काटने वाले कटर भी ले आए जिनकी मदद से बस की खिड़कियों को काटा गया इसके साथ ही मौके पर जेनरेटर सेट व जेसीबी मशीन भी मंगवाई गई ताकि जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जा सके। ग्रामीणों ने सभी विद्यार्थियाें को मिनी बस से बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। इस दौरान एक छात्रा को निकालने में ग्रामीणाें को काफी मेहनत करनी पड़ी। इसके लिए समय भी लगा। बाद में सभी घायलों को ग्रामीणाें की ही मदद से पीएचसी ले जाया गया, जहां पर उनके उपचार में भी मदद की।
मौके पर पहुंचे एसएचओ संजय अबरोल ने बताया कि दुर्घटना के बाद अगर ग्रामीणाें ने तुरंत और व्यापक बचाव अभियान को नहीं चलाया होता तो नुकसान ज्यादा हो सकता था।
बताया जाता है कि जैसे ही विद्यार्थियाें से भरी मिनी बस सड़क छोड़ कर के खाई की तरफ लुढ़की वैसे ही उसमें सवार विद्यार्थियाें में चीख पुकार मच गई। मौके पर अन्य वाहन में बैठे लोगाें के साथ ही ग्रामीण भी काफी संख्या में पहुंच गए। मौके पर पहुंचे ग्रामीण अपने साथ लोहा काटने वाले कटर भी ले आए जिनकी मदद से बस की खिड़कियों को काटा गया इसके साथ ही मौके पर जेनरेटर सेट व जेसीबी मशीन भी मंगवाई गई ताकि जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जा सके। ग्रामीणों ने सभी विद्यार्थियाें को मिनी बस से बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। इस दौरान एक छात्रा को निकालने में ग्रामीणाें को काफी मेहनत करनी पड़ी। इसके लिए समय भी लगा। बाद में सभी घायलों को ग्रामीणाें की ही मदद से पीएचसी ले जाया गया, जहां पर उनके उपचार में भी मदद की।
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मौके पर पहुंचे एसएचओ संजय अबरोल ने बताया कि दुर्घटना के बाद अगर ग्रामीणाें ने तुरंत और व्यापक बचाव अभियान को नहीं चलाया होता तो नुकसान ज्यादा हो सकता था।
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