{"_id":"5d7d4afb8ebc3e93c125feb7","slug":"crime-news-jammu-news-jmu193183495","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला की हत्या मामले में पति एवं अन्य आरोपों से रिहा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला की हत्या मामले में पति एवं अन्य आरोपों से रिहा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किए गए एक और आपराधिक मामले के चालान को कोर्ट ने खारिज कर दिया। पत्नी की हत्या के आरोप में पति एवं अन्य को आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने तर्क दिया कि प्रासीक्यूशन आरोपियों के खिलाफ केस साबित करने मेें फेल हुआ है। ऐसे में आरोपियों को बरी किया जाता है। पिछले 15 दिन में यह पांचवां मामला है, जिसमें आरोपियों के खिलाफ प्रासीक्यूशन केस साबित नहीं कर सका।
यह मामला वर्ष 2014 का है। सिद्धड़ा के पास शमशाद बीबी नाम की महिला का शव 18 अक्तूबर 2014 को सड़क किनारे मिला था। 17 अक्तूबर को महिला के लापता होने की शिकायत भी पुलिस केे पास दर्ज हुई थी। इसके बाद महिला के भाई के पुलिस ने बयान रिकार्ड किए। इसमें उसने बताया कि उसकी बहन की हत्या उसके पति राशिद अहमद, रफीक अहमद, अरशद अहमद और सुरैया बीबी ने की है। वह उसे दहेज के लिए तंग करते थे। उसे जान से मारने की धमकी देते थे। इन्हीं लोगों ने हत्या की है। प्रिंसिपल सेशन जज विनोद चटर्जी कौल ने दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामले में महिला के भाई की गवाही विश्वसनीय नहीं है। न ही इस मामले में कोई और गवाह है। जो यह साबित कर सके कि आरोपियों ने ही हत्या की है। प्रासीक्यूशन केस को साबित नहीं कर सका है। इसलिए इसमें पेश चालान खारिज किया जाता है और आरोपी बरी किए जाते हैं। जेएनएफ
विज्ञापन
यह मामला वर्ष 2014 का है। सिद्धड़ा के पास शमशाद बीबी नाम की महिला का शव 18 अक्तूबर 2014 को सड़क किनारे मिला था। 17 अक्तूबर को महिला के लापता होने की शिकायत भी पुलिस केे पास दर्ज हुई थी। इसके बाद महिला के भाई के पुलिस ने बयान रिकार्ड किए। इसमें उसने बताया कि उसकी बहन की हत्या उसके पति राशिद अहमद, रफीक अहमद, अरशद अहमद और सुरैया बीबी ने की है। वह उसे दहेज के लिए तंग करते थे। उसे जान से मारने की धमकी देते थे। इन्हीं लोगों ने हत्या की है। प्रिंसिपल सेशन जज विनोद चटर्जी कौल ने दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामले में महिला के भाई की गवाही विश्वसनीय नहीं है। न ही इस मामले में कोई और गवाह है। जो यह साबित कर सके कि आरोपियों ने ही हत्या की है। प्रासीक्यूशन केस को साबित नहीं कर सका है। इसलिए इसमें पेश चालान खारिज किया जाता है और आरोपी बरी किए जाते हैं। जेएनएफ
विज्ञापन