गम, गुस्से और आंसुओं के बीच अंतिम संस्कार
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मलयेशिया में मारे जाने वाले अजय कुमार का पार्थिव शरीर रविवार सुबह उसके पैतृक गांव सुजालपुर पहुंचा। इसके बाद अजय के परिवार समेत पूरा गांव गम और आंसुओं में डूब गया। हर किसी की आंख नम थी। मां और बहनों का रो-रो कर बुरा हाल था। छोटा भाई भी बिलख-बिलख कर विलाप कर रहा था।
पिता रोने के साथ-साथ हिम्मत दिखाते हुए बिखरे परिवार को समेटने की कोशिश करता रहा। इसके बाद अजय के पार्थिव शरीर को परमंडल में अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। यहां जम्मू पहुंचने पर गुस्साए परिवार वालों और गांववासियों ने प्रेस क्लब के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया।
अजय के पिता मुल्ख राज ने कहा कि अजय के साथ बिश्नाह का एक लड़का भी था। जो 15 अप्रैल के दिन अजय के साथ सुबह जम्मू आने के लिए हवाई जहाज की टिकट लेने के लिए गया था। अजय के साथ जम्मू के चार लड़के रहते थे, जो उसके साथ काम करते थे और उसके कमरे में रहते थे।
पुलिस को इन चारों से पूछताछ करनी चाहिए, ताकि सच्चाई का पता चल सके। अजय के चाचा अशोक का कहना है कि मौत के पीछे जरूर कोई कारण है। अजय की आकस्मिक मौत नहीं हो सकती। उसको हत्या की गई है। भारत सरकार को मलयेशिया सरकार से बात कर इस मामले की पूरी जांच करनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। तभी अजय की आत्मा को शांति मिलेगी।
किया गया अजय का अंतिम संस्कार
पारंपरिक रीति-रिवाज से अजय का संस्कार किया गया। परमंडल में हजारों लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए। अजय के दोस्तों का कहना है कि उसका स्वभाव ऐसा था ही नहीं कि किसी के साथ कोई झगड़ा करे। किसी ने उसको पैसों के लिए मारा है, क्योंकि साढ़े तीन साल से वह वहां पैसे कमा रहा था और अब घर आ रहा था।
मौके पर पहुंची कांग्रेस नेता स्वर्णलता ने कहा कि मलयेशिया में मौत होेने के दस दिन बाद अजय का शव घर पहुंचा। इसमें साफ पता चल रहा है कि अजय की मौत पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। दो दिन में शव पहुंचने की जगह दस दिन लगा दिए गए।
घर में शादी की थी तैयारी
अजय के घर आने पर उसकी शादी की जानी थी। मां-बाप ने उसके लिए लड़की देख रखी थी। घर आने पर शादी की बात आगे बढ़ाकर इसी साल शादी करनी थी, लेकिन शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। जिस घर में बेटे की बारात की तैयारियां की जानी थी, वहां बेटे की अर्थी निकली। दोनों बहनों और मां की चीखें सबके दिलों को छलनी कर रही थीं।