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J&K: न्यायालय ने लगाई प्री मैच्योर रिटायरमेंट पर रोक
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 10 Feb 2017 12:19 AM IST
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आदेशों को जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया
- फोटो : Demo Photo
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जम्मू संभाग के सांबा में तत्कालीन आईसीडीएस अधिकारी एवं कश्मीर प्रशासनिक सेवा (केएएस) उत्तीर्ण बुमेश शर्मा को जबरन रिटायर्ड करने के आदेशों को जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच के बगैर सीधे रिटायरमेंट के आदेश जारी नहीं किए जा सकते।
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न्यायाधीश आलोक आराध्य ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि जनहित में कई अधिकारियों को रिटायर्ड किया गया। जनहित मेें की गई रिटायरमेंट पर सुप्रीम कोर्ट मेें भी कई केस हुए हैं। केस में जन हित का कितना हित है इस पर सवाल किया गया। कोर्ट ने कहा कि कानून के दायरे में रह कर ही किसी अधिकारी को जबरन रिटायर्ड किया जा सकता है।
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कानून में कई प्रावधान हैं और इस मामले मेें कई आदेश भी सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए हैं। सरकार ने आदेश विभागीय जांच और कमेटी की सिफारिशों पर दिया है। कमेटी ने बैठक में कहा कि बुमेश शर्मा ने नियुक्तियों में धोखाधड़ी की है। चयन और प्रोमोशन में भी करीबियों को लाभ दिया है। उनके खिलाफ 2005 में एफआईआर भी दर्ज हुई है। सीबीआई ने जांच की और 2007 मेें क्लोजर रिपोर्ट पेश की, जिसे कोर्ट ने मंजूर किया।
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कोर्ट ने सरकार के फैसले को रद्द किया
कोर्ट ने सरकार के फैसले को रद्द किया
- फोटो : डेमो
यह भी बाद में बताया गया कि कोर्ट ने पाया कि याची के खिलाफ 2012 में दर्ज एफआईआर भी गलत थी और उसका नाम शामिल नहीं था। कोर्ट ने पूछा कि बुमेश शर्मा को विजिलेंस ने क्यों क्लीन चिट दी। कश्मीर प्रशासनिक सेवा में उनका चयन कैसे हुआ।
याची की एपीआर पर गौर नहीं किया गया है। विजिलेंस की 2009 में क्लीयरेंस के बाद याची को 2010 में केएएस बना दिया गया। क्लोजर रिपोर्ट मेें भी याची का नाम नहीं है। इस मामले में पूरा गौर करने के बाद कोर्ट ने सरकार के फैसले को रद्द कर दिया।
याची की एपीआर पर गौर नहीं किया गया है। विजिलेंस की 2009 में क्लीयरेंस के बाद याची को 2010 में केएएस बना दिया गया। क्लोजर रिपोर्ट मेें भी याची का नाम नहीं है। इस मामले में पूरा गौर करने के बाद कोर्ट ने सरकार के फैसले को रद्द कर दिया।