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Jammu News: वारिसों की सहमति से पिता के खाते की राशि पर बेटे को मिला अधिकार
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अदालत ने निपटाया उत्तराधिकार का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। प्रधान जिला न्यायालय सांबा ने उत्तराधिकार प्रमाणपत्र से जुड़े एक मामले में आदेश पारित करते हुए याचिकाकर्ता को पिता के बैंक खाते में जमा राशि प्राप्त करने का अधिकार दे दिया है। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए 4,66,973 रुपये की राशि के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने के आदेश दिए।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार शर्मा की अदालत में दायर याचिका में राकेश गुप्ता ने बताया कि उनके पिता मंगा राम गुप्ता का आठ जून, 2025 को निधन हो गया था। उनके नाम पर जम्मू-कश्मीर बैंक की बाड़ी ब्राह्मणा शाखा में एक बचत खाता मौजूद था जिसमें उक्त राशि जमा है।
अदालत के समक्ष मृत्यु प्रमाणपत्र, बैंक पासबुक सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज पेश किए गए। मामले में सार्वजनिक सूचना भी जारी की गई लेकिन किसी भी व्यक्ति ने दावा या आपत्ति दर्ज नहीं कराई। मामले के अन्य उत्तराधिकारियों ने भी अदालत में हलफनामे के जरिए याचिकाकर्ता के पक्ष में अपनी सहमति जताते हुए किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होने की बात कही। अदालत ने सभी साक्ष्यों और बयानों पर विचार करने के बाद माना कि याचिकाकर्ता कानूनन उत्तराधिकारी है और उसे उक्त राशि प्राप्त करने का अधिकार है। हालांकि अदालत ने शर्त रखी कि याचिकाकर्ता को नियमानुसार क्षतिपूर्ति बॉन्ड और जमानत बॉन्ड दाखिल करना होगा, ताकि भविष्य में यदि कोई बेहतर दावा सामने आए तो उसकी भरपाई की जा सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यक न्याय शुल्क जमा करने के बाद ही उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
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सांबा। प्रधान जिला न्यायालय सांबा ने उत्तराधिकार प्रमाणपत्र से जुड़े एक मामले में आदेश पारित करते हुए याचिकाकर्ता को पिता के बैंक खाते में जमा राशि प्राप्त करने का अधिकार दे दिया है। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए 4,66,973 रुपये की राशि के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने के आदेश दिए।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार शर्मा की अदालत में दायर याचिका में राकेश गुप्ता ने बताया कि उनके पिता मंगा राम गुप्ता का आठ जून, 2025 को निधन हो गया था। उनके नाम पर जम्मू-कश्मीर बैंक की बाड़ी ब्राह्मणा शाखा में एक बचत खाता मौजूद था जिसमें उक्त राशि जमा है।
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अदालत के समक्ष मृत्यु प्रमाणपत्र, बैंक पासबुक सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज पेश किए गए। मामले में सार्वजनिक सूचना भी जारी की गई लेकिन किसी भी व्यक्ति ने दावा या आपत्ति दर्ज नहीं कराई। मामले के अन्य उत्तराधिकारियों ने भी अदालत में हलफनामे के जरिए याचिकाकर्ता के पक्ष में अपनी सहमति जताते हुए किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होने की बात कही। अदालत ने सभी साक्ष्यों और बयानों पर विचार करने के बाद माना कि याचिकाकर्ता कानूनन उत्तराधिकारी है और उसे उक्त राशि प्राप्त करने का अधिकार है। हालांकि अदालत ने शर्त रखी कि याचिकाकर्ता को नियमानुसार क्षतिपूर्ति बॉन्ड और जमानत बॉन्ड दाखिल करना होगा, ताकि भविष्य में यदि कोई बेहतर दावा सामने आए तो उसकी भरपाई की जा सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यक न्याय शुल्क जमा करने के बाद ही उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
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