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राठना पंचायत की सरपंच शक्ति वाला ने ग्रामीण विकास विभाग को चनौती दी
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आरएस पुरा। राठना पंचायत की सरपंच शक्ति बाला ने ग्रामीण विकास विभाग के उस कानून को जम्मू हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें अविश्वास प्रस्ताव पारित कर एक सरपंच के अधिकारों पर रोक लगाने के अधिकार पंचों के पास हैं।
याचिकाकर्ता सरपंच ने एडवोकेट मोहम्मद लतीफ मलिक के माध्यम से दी गई चुनौती में कहा कि वर्ष 2018 में हुए पंचायत चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की और सरपंच पद के लिए यह सीट एक महिला जो अनुसूचित जाति से संबंधित हो, उसके लिए आरक्षित थी। उन्होंने पंचायत की बेहतरी के लिए काफी कार्य भी किया। पंचायत के कुछ पंचों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उनके अधिकारों पर रोक लगाई। याचिकाकर्ता ने अपनी अपील में कहा कि पंचायत की जनता ने चुनाव जिता कर सरपंच बनाया है। ऐसे में सरपंच के अधिकारों पर रोक लगाने का अधिकार भी पंचों के बजाय जनता के पास ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक विधायक और सांसद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने का कोई प्रावधान नहीं है। उसी तरह से एक सरपंच के अधिकारों पर भी रोक लगाने का कोई प्रावधान पंचों के पास नहीं होना चाहिए। क्योंकि सरपंच जनता द्वारा चुना गया ही एक प्रतिनिधि है । याचिकाकर्ता की अपील को हाईकोर्ट के जस्टिस सिंधु शर्मा ने एडवोकेट मोहम्मद लतीफ मलिक ने सुना और सरकार को नोटिस जारी करते हुए तीन हफ्तों के बीच जवाब मांगा।
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याचिकाकर्ता सरपंच ने एडवोकेट मोहम्मद लतीफ मलिक के माध्यम से दी गई चुनौती में कहा कि वर्ष 2018 में हुए पंचायत चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की और सरपंच पद के लिए यह सीट एक महिला जो अनुसूचित जाति से संबंधित हो, उसके लिए आरक्षित थी। उन्होंने पंचायत की बेहतरी के लिए काफी कार्य भी किया। पंचायत के कुछ पंचों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उनके अधिकारों पर रोक लगाई। याचिकाकर्ता ने अपनी अपील में कहा कि पंचायत की जनता ने चुनाव जिता कर सरपंच बनाया है। ऐसे में सरपंच के अधिकारों पर रोक लगाने का अधिकार भी पंचों के बजाय जनता के पास ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक विधायक और सांसद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने का कोई प्रावधान नहीं है। उसी तरह से एक सरपंच के अधिकारों पर भी रोक लगाने का कोई प्रावधान पंचों के पास नहीं होना चाहिए। क्योंकि सरपंच जनता द्वारा चुना गया ही एक प्रतिनिधि है । याचिकाकर्ता की अपील को हाईकोर्ट के जस्टिस सिंधु शर्मा ने एडवोकेट मोहम्मद लतीफ मलिक ने सुना और सरकार को नोटिस जारी करते हुए तीन हफ्तों के बीच जवाब मांगा।
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