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Jammu News: नारको आतंकवाद फंडिंग मामले में तीन आरोपियों की जमानत खारिज
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- अदालत ने कहा- आरोप गंभीर और देश की सुरक्षा पर असर डालने वाले
- जमानत मिलने से मुकदमे की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है
जेएनएफ
जम्मू। नारको आतंकवाद फंडिंग के हाई-प्रोफाइल मामले में जम्मू की तीसरी अतिरिक्त सत्र अदालत ने तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला गांधी नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था जिसे बाद में राज्य जांच एजेंसी जम्मू ने आगे जांच के लिए ले लिया था। अदालत ने पाया कि आरोपों के सच होने के पर्याप्त संकेत हैं और जमानत मिलने से मुकदमे की निष्पक्ष जांच और देश की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
जमानत खारिज होने वाले आरोपी सैयद आशिक इलाही, मोहम्मद रफीक नाजर और अजीज अहमद हैं। अदालत ने उनके वकीलों द्वारा पेश किए गए तर्क खारिज कर दिए जिनमें लंबी हिरासत, प्रत्यक्ष सबूतों की कमी और अन्य सह-आरोपियों को पहले जमानत मिलने का हवाला शामिल था। विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि आरोपियों का पाकिस्तान स्थित आतंक संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के हैंडलर के निर्देशन में नशीली दवाओं की तस्करी और आतंक फंडिंग में सक्रिय योगदान रहा। जांच में यह भी सामने आया कि इनके द्वारा जुटाए गए करोड़ों रुपये आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और अलगाववादी हिंसा के लिए इस्तेमाल किए गए।
अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और आरोपियों ने अपराध के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई है। आरोप ऐसे हैं जो देश की संप्रभुता और कानून व्यवस्था को सीधे चुनौती देते हैं। इस समय जमानत देना मुकदमे की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा हितों के खिलाफ होगा। इसलिए तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेंगे।
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- जमानत मिलने से मुकदमे की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है
जेएनएफ
जम्मू। नारको आतंकवाद फंडिंग के हाई-प्रोफाइल मामले में जम्मू की तीसरी अतिरिक्त सत्र अदालत ने तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला गांधी नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था जिसे बाद में राज्य जांच एजेंसी जम्मू ने आगे जांच के लिए ले लिया था। अदालत ने पाया कि आरोपों के सच होने के पर्याप्त संकेत हैं और जमानत मिलने से मुकदमे की निष्पक्ष जांच और देश की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
जमानत खारिज होने वाले आरोपी सैयद आशिक इलाही, मोहम्मद रफीक नाजर और अजीज अहमद हैं। अदालत ने उनके वकीलों द्वारा पेश किए गए तर्क खारिज कर दिए जिनमें लंबी हिरासत, प्रत्यक्ष सबूतों की कमी और अन्य सह-आरोपियों को पहले जमानत मिलने का हवाला शामिल था। विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि आरोपियों का पाकिस्तान स्थित आतंक संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के हैंडलर के निर्देशन में नशीली दवाओं की तस्करी और आतंक फंडिंग में सक्रिय योगदान रहा। जांच में यह भी सामने आया कि इनके द्वारा जुटाए गए करोड़ों रुपये आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और अलगाववादी हिंसा के लिए इस्तेमाल किए गए।
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अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और आरोपियों ने अपराध के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई है। आरोप ऐसे हैं जो देश की संप्रभुता और कानून व्यवस्था को सीधे चुनौती देते हैं। इस समय जमानत देना मुकदमे की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा हितों के खिलाफ होगा। इसलिए तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेंगे।
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