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Jammu News: नेताओं से सरकारी आवास खाली कराने पर पूरक अनुपालन रिपोर्ट पेश, याचिका बंद करने की मांग

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- रिपोर्ट में हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने का दिया हवाला
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- याचिकाकर्ताओं ने तार्किक निष्कर्ष पर ले जाने की जरूरत जताई
जम्मू। नेताओं से सरकारी आवास खाली कराने पर सरकार ने ताजा पूरक अनुपालन रिपोर्ट दायर की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाईकोर्ट के जारी आदेश का पालन किया गया है। लिहाजा इस याचिका को अब बंद कर दिया जाए। हालांकि याचिकाकर्ताओं ने सरकार द्वारा दायर पूरक अनुपालन रिपोर्ट में अवैध रूप से छह साल से अधिक समय तक बने रहने वाले अनधिकृत व्यक्तियों से व्यावसायिक किराया वसूलने का कोई उल्लेख नहीं है।
खंडपीठ की ओर से बार-बार निर्देश दिए गए हैं कि अवैध रहने वालों से व्यावसायिक किराया क्यों नहीं वसूला गया है। इन निर्देशों का कोई अनुपालन नहीं हुआ है।अवैध रहने वालों से व्यावसायिक किराया वसूल कर जनहित याचिका को उसके तार्किक निष्कर्ष पर ले जाने की आवश्यकता है।
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संपदा विभाग की पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता एस एस नंदा ने हाईकोर्ट में बताया कि खंडपीठ द्वारा 3 अप्रैल 2024 को पारित आदेश के अनुसार। प्रत्येक मामले में अलग-अलग आदेश पारित किए गए थे। बताया कि निर्देशों पर संपदा विभाग ने सभी पूर्व विधायकों, राजनीतिक व्यक्तियों को बेदखल कर दिया। जिनकी सूची खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। ये लोग सरकारी आवास के हकदार नहीं थे। सिवाय रविंदर शर्मा पूर्व एमएलसी के। जिन्होंने उच्च न्यायालय के समक्ष अपना मामला उठाया। उन्हें अदालत ने आवास में रहने की अनुमति दी थी।
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जबकि जो 7 अन्य लोग हैं। उनमें निजाम उद दीन भट, फैयाज अहमद मीर, एम वाई तारिगामी, सज्जाद गनी लोन, सुनील शर्मा, दलीप सिंह परिहार और आर एस पठानिया विधायक चुने गए हैं। उन्हें जम्मू एवं कश्मीर राज्य विधायक सदस्यों के आवासीय आवास नियम 1973 के अनुसार सरकारी आवास आवंटित किया गया है।


किराया वसूले के प्रावधानों में किया जा रहा संशोधन
एसएस नंदा ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी के निर्देशों के अनुसार दंडात्मक किराया वसूलने के प्रावधानों में संशोधन किया जा रहा है। जिससे अंतिम निष्कासन नोटिस जारी करने के बजाय कब्जे की समाप्ति से दंडात्मक किराया वसूला जाए। सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी मिलने के तुरंत बाद इस संबंध में उचित आदेश जारी किए जाए। चूंकि खंडपीठ के निर्देशों का अनुपालन किया गया है। इसलिए तत्काल जनहित याचिका को बंद कर दिया जाए। इस पर याचिकाकर्ता के वकील एस एस अहमद ने कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार किए जाने तक जनहित याचिका को व्यापक जनहित में जारी रखा जाना चाहिए। इस पर मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तान दलीलों पर विचार करने के अधिवक्ता एसएस अहमद से कह कि यदि वह चाहें तो सीनियर एएजी द्वारा दायर पूरक अनुपालन रिपोर्ट पर अपना जवाब दाखिल करें। (जेएनएफ)
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