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Jammu News: नगरोटा आतंकी हमले के आरोपी कादरी की जमानत अर्जी खारिज
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- कोर्ट ने कहा - गवाहों पर पड़ सकता है असर, हमले में सात जवान बलिदान हुए थे
जम्मू। विशेष एनआईए अदालत ने नगरोटा सैन्य शिविर पर आतंकी हमले के आरोपी सैयद मुनीर-उल-हसन कादरी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने कहा, मामले की गंभीरता, गवाहों को प्रभावित करने की आशंका और मुकदमे की मौजूदा स्थिति को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती।
मामला 29 नवंबर 2016 को नगरोटा के बलेनी पुल के पास सैन्य शिविर पर हुए आतंकी हमले से जुड़ा है। हमले में सात जवान बलिदान हुए थे। जांच एजेंसी के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद के तीन पाकिस्तानी आतंकियों ने हमले को अंजाम दिया था। कादरी ने आतंकियों को ठिकाना, आवाजाही और अन्य जरूरी मदद उपलब्ध कराई। सीमा पार बैठे संचालकों के संपर्क में रहा। एनआईए ने कोर्ट को बताया कि एक सह आरोपी सरकारी गवाह बन चुका है और कई गवाह आरोपी के खिलाफ बयान दे चुके हैं। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी अप्रैल 2018 से जेल में है। एनआईए ने कहा कि आरोपी को जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित करने और मुकदमे पर असर पड़ने की आशंका है। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रेम सागर ने कहा कि 104 में से अभी केवल 42 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं और कई अहम गवाहों की गवाही बाकी है। ऐसे में सिर्फ लंबी न्यायिक हिरासत जमानत का आधार नहीं बन सकती। इन परिस्थितियों में अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। जेएनएफ
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जम्मू। विशेष एनआईए अदालत ने नगरोटा सैन्य शिविर पर आतंकी हमले के आरोपी सैयद मुनीर-उल-हसन कादरी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने कहा, मामले की गंभीरता, गवाहों को प्रभावित करने की आशंका और मुकदमे की मौजूदा स्थिति को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती।
मामला 29 नवंबर 2016 को नगरोटा के बलेनी पुल के पास सैन्य शिविर पर हुए आतंकी हमले से जुड़ा है। हमले में सात जवान बलिदान हुए थे। जांच एजेंसी के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद के तीन पाकिस्तानी आतंकियों ने हमले को अंजाम दिया था। कादरी ने आतंकियों को ठिकाना, आवाजाही और अन्य जरूरी मदद उपलब्ध कराई। सीमा पार बैठे संचालकों के संपर्क में रहा। एनआईए ने कोर्ट को बताया कि एक सह आरोपी सरकारी गवाह बन चुका है और कई गवाह आरोपी के खिलाफ बयान दे चुके हैं। बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी अप्रैल 2018 से जेल में है। एनआईए ने कहा कि आरोपी को जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित करने और मुकदमे पर असर पड़ने की आशंका है। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रेम सागर ने कहा कि 104 में से अभी केवल 42 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं और कई अहम गवाहों की गवाही बाकी है। ऐसे में सिर्फ लंबी न्यायिक हिरासत जमानत का आधार नहीं बन सकती। इन परिस्थितियों में अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। जेएनएफ
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