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Jammu News: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में महिलाओं और बुजुर्गों से जुड़े सात फीसदी मामले लंबित
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एनजेडीजी के अनुसार हाईकोर्ट में साढ़े तीन लाख से भी अधिक मामले अभी अटके
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में 3,63,055 मामले लंबित हैं। इनमें 2,40,421 आपराधिक, जबकि 1,22,634 मामले सिविल के हैं। महिलाओं और बुजुर्गों से संबंधित ऐसे लंबित मामलों की बात की जाए तो इनकी संख्या सात प्रतिशत है।
नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड यानी एनजेडीजी के आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में महिलाओं से संबंधित कुल 26,547 मामले इस वक्त लंबित हैं। इनमें 14,355 आपराधिक, जबकि 12,190 दीवानी और फौजदारी के मामले शामिल हैं। महिलाओं से होने वाली मार-पीट, हमले जैसे मामले ज्यादा हैं। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित 26,794 केस पेंडिंग हैं। इनमें से 5,331 क्रिमिनल, जबकि 21,463 सिविल मामले हैं। वरिष्ठ नागरिकों की सबसे ज्यादा शिकायतें जमीनों पर अवैध कब्जा किए जाने से संबंधित हैं।
हाईकोर्ट की ओर से लंबित केसों की संख्या कम करने के लिए लगातार लोक अदालतों का भी आयोजन किया जा रहा है, ताकि ये मामले आपसी सुलह और सहमति के आधार पर निपटाए जा सकें। इसके साथ ही हाईकोर्ट की ओर से यह भी प्रयास किया जा रहा है कि जमानत संबंधी आवेदनों को शीघ्र सुनवाई कर निपटाया जाए। इसके लिए कुछ समय पहले विशेष बेंच का भी गठन किया गया है। यंग लॉयर्स एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी एडवोकेट गगनदीप सिंह लकी के अनुसार जमानत के आवेदनों के त्वरित निराकरण भी हो रहे हैं। यह कवायद रंग लाने वाली है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में 3,63,055 मामले लंबित हैं। इनमें 2,40,421 आपराधिक, जबकि 1,22,634 मामले सिविल के हैं। महिलाओं और बुजुर्गों से संबंधित ऐसे लंबित मामलों की बात की जाए तो इनकी संख्या सात प्रतिशत है।
नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड यानी एनजेडीजी के आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में महिलाओं से संबंधित कुल 26,547 मामले इस वक्त लंबित हैं। इनमें 14,355 आपराधिक, जबकि 12,190 दीवानी और फौजदारी के मामले शामिल हैं। महिलाओं से होने वाली मार-पीट, हमले जैसे मामले ज्यादा हैं। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित 26,794 केस पेंडिंग हैं। इनमें से 5,331 क्रिमिनल, जबकि 21,463 सिविल मामले हैं। वरिष्ठ नागरिकों की सबसे ज्यादा शिकायतें जमीनों पर अवैध कब्जा किए जाने से संबंधित हैं।
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हाईकोर्ट की ओर से लंबित केसों की संख्या कम करने के लिए लगातार लोक अदालतों का भी आयोजन किया जा रहा है, ताकि ये मामले आपसी सुलह और सहमति के आधार पर निपटाए जा सकें। इसके साथ ही हाईकोर्ट की ओर से यह भी प्रयास किया जा रहा है कि जमानत संबंधी आवेदनों को शीघ्र सुनवाई कर निपटाया जाए। इसके लिए कुछ समय पहले विशेष बेंच का भी गठन किया गया है। यंग लॉयर्स एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी एडवोकेट गगनदीप सिंह लकी के अनुसार जमानत के आवेदनों के त्वरित निराकरण भी हो रहे हैं। यह कवायद रंग लाने वाली है।
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