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लोगों के विश्वास को बढ़ाने के लिए जजों को दृढ़ संकल्पित होना चाहिए : मुख्य न्यायाधीश
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नव चयनित जजों के लिए पूर्व-नियुक्ति प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोलते मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर स
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न्यायिक व्यवस्था में चयनित नए जजों की नियुक्ति से पहले प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। न्यायिक व्यवस्था में चयनित नए जजों की नियुक्ति से पहले उनके लिए पूर्व नियुक्ति प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विशेष रूप से पहुंचे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह ने कहा कि न्याय की अवधारणा को हमारे संविधान में समाहित एक विलक्षण दृष्टिकोण के रूप में माना जा सकता है, जिसकी उत्पत्ति भारत की मिट्टी से हुई है। न्याय की धारणा आमतौर पर एक अंतर्निहित धारणा से जुड़ी होती है कि न्याय समान अधिकारों और कानून प्रणाली में पहुंच, निष्पक्ष उपचार के समान अवसर की अवधारणा के बराबर है। उन्होंने कहा कि कानून में न्यायिक शक्ति का स्रोत वास्तव में न्यायिक शक्तियों का प्रभावी प्रयोग है, जो दो स्रोतों से उत्पन्न होता है। न्यायाधीशों को न्यायिक कार्यालय का सम्मान करना होगा, जिसे वे सार्वजनिक विश्वास के भंडार के रूप में रखते हैं। इस बात पर जोर दिया कि हर कार्य और हर शब्द चाहे बोला गया हो या लिखा गया हो, सही ढंग से दिखाना और प्रतिबिंबित करना चाहिए कि आप सार्वजनिक विश्वास का पद संभाल रहे हैं। न्यायिक प्रणाली में लोगों के विश्वास को बढ़ाने और बनाए रखने के लिए लगातार कड़ी मेहनत करने के लिए दृढ़ संकल्पित होना चाहिए। इस मौके पर गवर्निंग कमेटी के अध्यक्ष न्यायाधीश संजीव कुमार, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष न्यायाधीश ताशी रबस्टन, न्यायाधीश संजीव कुमार, सिंधु शर्मा, जावेद इकबाल वानी, पुनीत गुप्ता, मोक्षा खजूरिया काजमी, एमवाई वानी और जम्मू विंग के सभी न्यायाधीश कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुए।
वहीं, जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी की गवर्निंग कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने अकादमी द्वारा तैयार पूर्व नियुक्ति प्रशिक्षण कार्यक्रम मॉड्यूल का अवलोकन दिया। कहा कि इंडक्शन कोर्स का प्राथमिक उद्देश्य कच्ची प्रतिभा को बेहतरीन न्यायिक अधिकारियों के रूप में तैयार करने के लिए एक मजबूत आधार तैयार करना है। इस बात पर प्रकाश डाला कि इंडक्शन कोर्स का मुख्य फोकस न्यायिक नैतिकता, न्यायिक कौशल और योग्यता का विकास और सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। न्यायिक व्यवस्था में चयनित नए जजों की नियुक्ति से पहले उनके लिए पूर्व नियुक्ति प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विशेष रूप से पहुंचे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह ने कहा कि न्याय की अवधारणा को हमारे संविधान में समाहित एक विलक्षण दृष्टिकोण के रूप में माना जा सकता है, जिसकी उत्पत्ति भारत की मिट्टी से हुई है। न्याय की धारणा आमतौर पर एक अंतर्निहित धारणा से जुड़ी होती है कि न्याय समान अधिकारों और कानून प्रणाली में पहुंच, निष्पक्ष उपचार के समान अवसर की अवधारणा के बराबर है। उन्होंने कहा कि कानून में न्यायिक शक्ति का स्रोत वास्तव में न्यायिक शक्तियों का प्रभावी प्रयोग है, जो दो स्रोतों से उत्पन्न होता है। न्यायाधीशों को न्यायिक कार्यालय का सम्मान करना होगा, जिसे वे सार्वजनिक विश्वास के भंडार के रूप में रखते हैं। इस बात पर जोर दिया कि हर कार्य और हर शब्द चाहे बोला गया हो या लिखा गया हो, सही ढंग से दिखाना और प्रतिबिंबित करना चाहिए कि आप सार्वजनिक विश्वास का पद संभाल रहे हैं। न्यायिक प्रणाली में लोगों के विश्वास को बढ़ाने और बनाए रखने के लिए लगातार कड़ी मेहनत करने के लिए दृढ़ संकल्पित होना चाहिए। इस मौके पर गवर्निंग कमेटी के अध्यक्ष न्यायाधीश संजीव कुमार, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष न्यायाधीश ताशी रबस्टन, न्यायाधीश संजीव कुमार, सिंधु शर्मा, जावेद इकबाल वानी, पुनीत गुप्ता, मोक्षा खजूरिया काजमी, एमवाई वानी और जम्मू विंग के सभी न्यायाधीश कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुए।
वहीं, जम्मू-कश्मीर न्यायिक अकादमी की गवर्निंग कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने अकादमी द्वारा तैयार पूर्व नियुक्ति प्रशिक्षण कार्यक्रम मॉड्यूल का अवलोकन दिया। कहा कि इंडक्शन कोर्स का प्राथमिक उद्देश्य कच्ची प्रतिभा को बेहतरीन न्यायिक अधिकारियों के रूप में तैयार करने के लिए एक मजबूत आधार तैयार करना है। इस बात पर प्रकाश डाला कि इंडक्शन कोर्स का मुख्य फोकस न्यायिक नैतिकता, न्यायिक कौशल और योग्यता का विकास और सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है।
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