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Jammu News: छह साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी जमानत याचिका खारिज
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के उच्च न्यायालय ने श्रीनगर के नौशहरा इलाके में एक छह साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 31 मार्च 2022 को नौशहरा में किराए के मकान में रहने वाली बारामुला निवासी एक शिकायतकर्ता ने शिकायत की कि उसकी दो बच्चियां घर के लॉन में खेल रही थीं। उसी घर में ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले अमित अंबरदार नामक व्यक्ति ने दोनों को अपने कमरे में बुलाया और एक बच्ची को दुकान पर खाने का सामान लेने के लिए भेज दिया।
आरोपी ने उसकी दूसरी बेटी के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पीड़िता के बयान दर्ज कर मेडिकल जांच भी कराई गई। अभियोजन पक्ष ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ अपराध साबित हुआ और उसके खिलाफ 27 मई 2022 को आरोप पत्र पेश किया गया। अमित अंबरदार निवासी जानीपुर (जम्मू) पर 27 जून 2022 को ट्रायल कोर्ट ने धारा 506 आईपीसी और पॉक्सो अधिनियम की धारा 9/10 के तहत आरोप लगाया था। मामले में याचिकाकर्ता पर पीड़िता का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है, जिसकी उम्र महज छह साल है। अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति, पीड़िता और गवाहों के संदर्भ में आरोपी की स्थिति और जनहित जैसे अन्य विचार भी कुछ ऐसे विचार हैं, जिन्हें आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करते समय ध्यान में रखना जरूरी है। इस मामले में प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत के समक्ष अपना बयान देते समय पीड़िता ने घटना के उस संस्करण से विचलन नहीं किया है, जो उसने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत अपने बयान में बताया था। अदालत ने पाया कि आरोपी की उम्र करीब 41 साल है और वह उसी इमारत में रह रहा था, जिसमें पीड़िता अपने परिवार के साथ रह रही थी और वह उसे अपना चाचा कहती थी। याचिकाकर्ता और पीड़िता की उम्र में अंतर उसके कृत्य को और अधिक जघन्य बनाता है, इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।
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आरोपी ने उसकी दूसरी बेटी के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पीड़िता के बयान दर्ज कर मेडिकल जांच भी कराई गई। अभियोजन पक्ष ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ अपराध साबित हुआ और उसके खिलाफ 27 मई 2022 को आरोप पत्र पेश किया गया। अमित अंबरदार निवासी जानीपुर (जम्मू) पर 27 जून 2022 को ट्रायल कोर्ट ने धारा 506 आईपीसी और पॉक्सो अधिनियम की धारा 9/10 के तहत आरोप लगाया था। मामले में याचिकाकर्ता पर पीड़िता का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है, जिसकी उम्र महज छह साल है। अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति, पीड़िता और गवाहों के संदर्भ में आरोपी की स्थिति और जनहित जैसे अन्य विचार भी कुछ ऐसे विचार हैं, जिन्हें आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करते समय ध्यान में रखना जरूरी है। इस मामले में प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मामले की सुनवाई के दौरान निचली अदालत के समक्ष अपना बयान देते समय पीड़िता ने घटना के उस संस्करण से विचलन नहीं किया है, जो उसने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत अपने बयान में बताया था। अदालत ने पाया कि आरोपी की उम्र करीब 41 साल है और वह उसी इमारत में रह रहा था, जिसमें पीड़िता अपने परिवार के साथ रह रही थी और वह उसे अपना चाचा कहती थी। याचिकाकर्ता और पीड़िता की उम्र में अंतर उसके कृत्य को और अधिक जघन्य बनाता है, इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।
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