{"_id":"618d7918b5d73e3b690ac38f","slug":"court-news-jammu-city-news-jmu247642769","type":"story","status":"publish","title_hn":"अदालतों में कर्मियों की कमी पर एक माह में बैठक बुलाने के निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अदालतों में कर्मियों की कमी पर एक माह में बैठक बुलाने के निर्देश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। उच्च न्यायालय के बैंच सचिव जोगिंदर सिंह द्वारा अदालतों में कर्मचारियों की कमी के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति मोहन लाल ने मुख्य सचिव को एक माह के भीतर बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इसकी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।
डिवीजन बैंच ने कहा कि याचिकाकर्ता जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उच्च न्यायालय में कार्यरत बैंच सचिव हैं। उन्होंने कुछ राहतों की मांग करते हुए इस याचिका को प्राथमिकता दी है। इसमें से एक मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में 13 से 15 सितंबर 2002 को पारित प्रस्ताव को मंजूरी देना है। इससे उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के वेतन और भत्ते में वृद्धि हो सकेगी। अन्य राहतों में से एक उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के वेतन में 20 प्रतिशत की वृद्धि की है।
डिवीजन बैंच ने देखा कि न्यायालय ने पहले भी उपरोक्त विवादों को हल करने के लिए मुख्य सचिव, कानून सचिव और रजिस्ट्रार जनरल की बैठक बुलाने का निर्देश दिया था। यह आरोप लगाया गया है कि बैठक आयोजित की गई, लेकिन उसमें केवल शेट्टी आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन पर विचार किया गया और वर्तमान याचिका में दावा की गई राहत के संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
डिवीजन बैंच ने कहा कि याचिकाकर्ता जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उच्च न्यायालय में कार्यरत बैंच सचिव हैं। उन्होंने कुछ राहतों की मांग करते हुए इस याचिका को प्राथमिकता दी है। इसमें से एक मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में 13 से 15 सितंबर 2002 को पारित प्रस्ताव को मंजूरी देना है। इससे उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के वेतन और भत्ते में वृद्धि हो सकेगी। अन्य राहतों में से एक उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के वेतन में 20 प्रतिशत की वृद्धि की है।
विज्ञापन
डिवीजन बैंच ने देखा कि न्यायालय ने पहले भी उपरोक्त विवादों को हल करने के लिए मुख्य सचिव, कानून सचिव और रजिस्ट्रार जनरल की बैठक बुलाने का निर्देश दिया था। यह आरोप लगाया गया है कि बैठक आयोजित की गई, लेकिन उसमें केवल शेट्टी आयोग की रिपोर्ट के कार्यान्वयन पर विचार किया गया और वर्तमान याचिका में दावा की गई राहत के संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई।
विज्ञापन