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शोपीस बनाने को खरीदे थे, ये महंगे उपकरण?

Sun, 16 Nov 2014 03:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Sun, 16 Nov 2014 03:14 PM IST
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costly equipments became showpiece in jammu hospitals

मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से स्थापित किए गए आधुनिक उपकरण धूल चाट रहे हैं। संभाग के दूरवर्ती क्षेत्रों से लेकर शहरी अस्पतालों में ऐसे उपकरणों के ठप होने से मरीजों को आधुनिक चिकित्सा से महरूम रहना पड़ रहा है। जिससे तीमारदारों को मजबूरन अपने मरीजों को इलाज के लिए निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है।

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संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जीएमसी की इमरजेंसी में कई हफ्तों से सीटी स्कैन मशीन बंद पड़ी है। पहले फ्लोर पर एमआरआई मशीन भी जवाब दे गई है। हालांकि मरीजों को सीटी स्कैन के लिए एसएमजीएस अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, लेकिन टेस्ट के लिए कई अस्पतालों के चक्कर काटने से मरीजों का दर्द और बढ़ जाता है। अब बात करें आधुनिक टेलीमेडिसिन सुविधा की।
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इस सुविधा से देश के विख्यात अस्पतालों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से गंभीर मरीजों को उचित इलाज देने की दिशा में काम किया जाता है। मगर एक दशक पहले शुरू की गई इस सुविधा को दोबारा बहाल करने के लिए किसी ने प्रयास नहीं किया। जिला अस्पतालों में लाखों रुपये के संसाधन शोपीस बने हुए हैं।
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संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जीएमसी में टेलीमेडिसिन सुविधा को फार्माकोलाजी विभाग में शिफ्ट किया गया, लेकिन इस व्यवस्था को अभी तक दोबारा शुरू होने का इंतजार है। जिला अस्पताल कठुआ में संसाधन तो उपलब्ध हैं, मगर उन्हें चलाने के लिए स्टाफ ही नहीं है। जिला अस्पताल पुंछ में भी सालों से बंद पड़ी टेलीमेडिसिन की किसी ने सुध नहीं ली है।


इसी तरह गांधीनगर अस्पताल में कुछ माह पहले मरीजों को डायलेसिस की सुविधा दी गई, लेकिन डाक्टर के स्थानांतरण होने के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था न करने से डायलेसिस सुविधा बंद हो गई। सरवाल और उधमपुर अस्पताल में तकनीकी स्टाफ न होने से डायलेसिस मशीनों का श्रीगणेश ही नहीं हो सका है। इसी तरह अन्य कई उपकरण भी ठप पड़े हुए हैं।

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