{"_id":"5f2fe4e98ebc3e3ccc5f66a4","slug":"coronavirus-in-jammu-kashmir-j-k-news-in-hindi-mata-vaishno-devi-entry-will-be-given-only-after-thermal-screening-at-religious-places","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीरः धार्मिक स्थलों में थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही मिलेगा प्रवेश, तैयारियां तेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीरः धार्मिक स्थलों में थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही मिलेगा प्रवेश, तैयारियां तेज
Sun, 09 Aug 2020 05:29 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 09 Aug 2020 05:29 PM IST
विज्ञापन
जम्मू कश्मीर में कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला, फाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में 16 अगस्त से सभी धार्मिक स्थलों में आम लोगों को प्रवेश मिलेगा। मंदिर प्रबंधक समितियों ने श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य निरीक्षण और सामुदायिक दूरी की व्यवस्थाएं करनी शुरू कर दी हैं। धार्मिक स्थलों पर आम लोगों के प्रवेश को लेकर प्रदेश सरकार अलग से दिशा-निर्देश जारी करेगी।
विज्ञापन
यह भी पढ़ेंः जम्मू-कश्मीर की वो जगह जहां दफन हैं जहांगीर की आंतें, जबकि बाकी शरीर लाहौर में दफनाया गया
विज्ञापन
प्रदेश सहित जम्मू शहर में पिछले चार महीने से धार्मिक स्थल आम लोगों के लिए बंद हैं। चार अगस्त को जारी गाइडलाइन में प्रदेश में 16 अगस्त से सभी धार्मिक स्थलों को आम लोगों के लिए खोलने की इजाजत दी गई है। मंदिर प्रबंधनों ने भी अपनी एसओपी जारी की है।
विज्ञापन
धर्मार्थ ट्रस्ट ने अपने सभी मंदिरों में प्रवेश के लिए थर्मल स्क्रीनिंग को अनिवार्य किया है। एक समय में चालीस से पचास यात्रियों के दल को ही दर्शन करने की इजाजत दी जाएगी। बावे वाली माता मंदिर परिसर में सैनिटाइजिंग टनल लगाई गई है। मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को इससे होकर गुजारना पड़ेगा। वहीं, थर्मल स्क्रीनिंग के लिए थर्मामीटर खरीदे गए हैं।
यह भी पढ़ेंः अरुण जेटली घर में पढ़ते थे जम्मू-कश्मीर का संविधान, पर इस प्लान से संगीता भी थीं अनजान
मंदिरों में घंटी को नहीं छू सकेंगे
अगस्त के दूसरे पखवाड़े के शुरू होते ही मंदिरों के द्वार आम श्रद्धालुओं के लिए भले ही खुल जाएंगे, लेकिन श्रद्धालु मंदिर की घंटी को नहीं छू पाएंगे। इसके लिए विशेष निर्देशावली प्रदर्शित होगी। सामान्य तौर पर ज्यादातर श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के दौरान आते और जाते घंटी बजाकर गुजरते हैं।