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जम्मू-कश्मीर में कोरोना: निजी स्कूल संचालकों के लिए चालकों को वेतन देना हुआ मुश्किल
Thu, 20 May 2021 11:57 AM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Thu, 20 May 2021 11:57 AM IST
सार
फी फिक्सेशन कमेटी और स्कूल शिक्षा निदेशालय के समक्ष रखी ट्रांसपोर्ट शुल्क की मांग।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social media
विस्तार
कोरोना के बीच निजी स्कूल संचालकों की परेशानी बढ़ती जा रही है। संचालकों का कहना है कि स्कूल बंद होने से सिर्फ ट्यूशन फीस लेने की अनुमित है। ऐसे में स्टाफ को वेतन देना चुनौती बना हुआ है। उनकी मांग है कि सरकार उन्हें 50 प्रतिशत ट्रांसपोर्ट शुल्क लेने की अनुमति दे, ताकि वे स्कूल बसों की किश्तें और चालक-सहचालकों को वेतन दे सकें।
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निजी स्कूल संचालकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने फी फिक्सेशन कमेटी को अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें वर्तमान स्थिति को उजागर किया गया है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल गुप्ता ने कहा कि सरकार की नीतियां निजी स्कूलों को बंद करने की हैं। कोरोना के बीच स्कूल बंद होने से स्कूल बसें भी लंबे समय से बंद हैं।
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ऐसे में इनकी बैंक किश्तें और इंश्योरेंस फीस जाम नहीं हो पा रही। हमने फी फिक्सेशन कमेटी और स्कूल शिक्षा निदेशालय के समक्ष मांग रखी थी कि अभिभावकों से 50 प्रतिशत ट्रांसपोर्ट फीस लेने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि फी फिक्सेशन कमेटी ने उनसे बसों का विवरण मांगा था, लेकिन उसके बाद कोई पहल नहीं की गई है।
स्कूल शिक्षा निदेशक रवि शंकर शर्मा ने कहा कि स्कूलों के प्रतिनिधिमंडल ट्रांसपोर्ट शुल्क लेने की मांग कर रहे हैं। निजी स्कूलों की मांग पर ध्यान दिया जा रहा है।