भाजपा दो नाव पर सवार, डूबेगी नैया : उमर
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अनुच्छेद 370 पर रियासत की राजनीति गरमा गई है। पहले गृहमंत्री ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बताकर चुनावी मुद्दा न बनाए जाने की घोषणा की। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी इससे किनारा करने पर विपक्षियों ने भाजपा पर हमले तेज कर दिए। विपक्षी भाजपा पर हमले तो कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा चुनाव में कोई भी राष्ट्रीय राजनीतिक दल इस मुद्दे को उठाकर जोखिम मोल नहीं लेना चाहता। भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे को दरकिनार कर ही चुनाव मैदान में हैं।
कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) सभी ने भाजपा पर लोगों को गुमराह करने के आरोप लगाए हैं। विपक्षियों का कहना है कि भाजपा दोहरी नीति अपनाकर अवाम को धोखे में रखकर चुनावी लाभ लेना चाहती है। विपक्षी इसे मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी तथा घाटी में प्रवेश के संघ के एजेंडे के रूप में देख रहे हैं।
मुख्यमंत्री और नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पार्टी अलग अलग नीतियों पर काम कर रही है। अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर वह दो नाव पर सवार है। दो नाव की सवारी करने वाले अंतत: डूब जाते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा दो नाव पर पांव रख रही है जिससे उसका डूबना तय है।
भाजपा पर अवसरवादी पार्टी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब वह 370 से किनारा काट रही है क्योंकि इससे वह समस्या में पड़ सकती है। यह राष्ट्रीय समस्या बना हुआ है। अब तो भाजपा के ही प्रत्याशी ही कहने लगे हैं कि इससे छेड़छाड़ करने पर वे हथियार उठा लेंगे।
कांग्रेस, नेकां, पीडीपी ने भाजपा पर तेज किए हमले
कांग्रेस का कहना है कि आजादी के बाद से ही अनुच्छेद 370 का मुद्दा उठा रही पार्टी अब इस पर मौन साध गई है। उसे इससे वोट कटने का खतरा नजर आने लगा तो उसने बड़ी चतुराई से इस मुद्दे को किनारे कर दिया। अब इस पर राष्ट्रीय बहस कराने तथा अवाम की आवाज के आधार पर फैसला करने की बात कही जा रही है।
रियासत में कांग्रेस का चेहरा माने जाने वाले गुलाम नबी आजाद ने रविवार को घोषणापत्र जारी करने के बाद यहां तक कहा कि भाजपा की न तो कोई नीति है और न विचारधारा। वहीं पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद का मानना है कि इसे किसी भी कीमत पर खत्म नहीं किया जा सकता। इस पर अनावश्यक राजनीतिक रोटी सेंकने की कोशिश की जा रही है।
जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा कोई रियायत नहीं है बल्कि यह ऐतिहासिक जरूरत है और राष्ट्र के संस्थापकों ने इस जरूरत को समझते हुए इसका प्रावधान किया था। भाजपा ने इस मुद्दे पर आश्चर्यजनक रूप से चुप्पी साध ली है। पार्टी का कहना है कि वह रियासत के विकास, बेरोजगारी दूर करने तथा रियासत में खुशहाली लाने के लिए चुनाव मैदान में है।