{"_id":"6838c96d1bba82e0c30aaa31","slug":"compensation-will-not-be-given-without-proof-it-is-necessary-to-prove-deficiency-in-service-jammu-news-c-10-lko1027-624457-2025-05-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: सुबूत के बिना नहीं मिलेगा मुआवजा, सेवा में कमी साबित करना जरूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: सुबूत के बिना नहीं मिलेगा मुआवजा, सेवा में कमी साबित करना जरूरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने उपभोक्ता मामलों से जुड़े एक फैसले में कहा है कि किसी भी सेवा प्रदाता से मुआवजा लेने या सामान बदलवाने के लिए उपभोक्ता को यह साबित करना होगा कि सेवा में कमी या लापरवाही हुई है।
अपने फैसले में न्यायालय ने जिला उपभोक्ता मंच जम्मू और राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा दिए गए आदेशों को खारिज कर दिया, जिसमें एक कार की अदला-बदली और 50,000 रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
मामला साल 2017 का है। जम्मू निवासी महिला ने शहर के ही एक मारुति डीलरशिप से ऑल्टो 800 खरीदी थी। उन्होंने गाड़ी का पंजीकरण आरटीओ जम्मू में करवाने की कोशिश की तो उन्हें बताया गया कि इसी चेसिस नंबर की गाड़ी पहले से असम में पंजीकृत है।
विज्ञापन
इस पर उन्होंने डीलर से गाड़ी बदलने की मांग की लेकिन डीलर ने इन्कार कर दिया। इसके बाद महिला ने जिला उपभोक्ता मंच का रुख किया। इस पर डीलर को गाड़ी बदलने और मुआवजा देने का आदेश दिया गया। राज्य आयोग ने भी यह फैसला बरकरार रखा।
हाई कोर्ट में अपील करने पर अदालत ने पाया कि यह गलती डीलर की नहीं है, बल्कि असम आरटीओ की ओर से चेसिस नंबर दर्ज करने में हुई टाइपिंग की गलती के कारण यह स्थिति उपजी है। बाद में यह गलती सुधार दी गई और गाड़ी का पंजीकरण 14 मार्च 2020 को हो गया।
जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उपभोक्ता मंच ने बिना पूरे तथ्यों को परखे ही डीलर को दोषी ठहरा दिया, जबकि संबंधित परिवहन अधिकारियों को पक्षकार ही नहीं बनाया गया।
विज्ञापन
अपने फैसले में न्यायालय ने जिला उपभोक्ता मंच जम्मू और राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा दिए गए आदेशों को खारिज कर दिया, जिसमें एक कार की अदला-बदली और 50,000 रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
विज्ञापन
मामला साल 2017 का है। जम्मू निवासी महिला ने शहर के ही एक मारुति डीलरशिप से ऑल्टो 800 खरीदी थी। उन्होंने गाड़ी का पंजीकरण आरटीओ जम्मू में करवाने की कोशिश की तो उन्हें बताया गया कि इसी चेसिस नंबर की गाड़ी पहले से असम में पंजीकृत है।
विज्ञापन
इस पर उन्होंने डीलर से गाड़ी बदलने की मांग की लेकिन डीलर ने इन्कार कर दिया। इसके बाद महिला ने जिला उपभोक्ता मंच का रुख किया। इस पर डीलर को गाड़ी बदलने और मुआवजा देने का आदेश दिया गया। राज्य आयोग ने भी यह फैसला बरकरार रखा।
हाई कोर्ट में अपील करने पर अदालत ने पाया कि यह गलती डीलर की नहीं है, बल्कि असम आरटीओ की ओर से चेसिस नंबर दर्ज करने में हुई टाइपिंग की गलती के कारण यह स्थिति उपजी है। बाद में यह गलती सुधार दी गई और गाड़ी का पंजीकरण 14 मार्च 2020 को हो गया।
जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस विनोद चटर्जी कौल की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उपभोक्ता मंच ने बिना पूरे तथ्यों को परखे ही डीलर को दोषी ठहरा दिया, जबकि संबंधित परिवहन अधिकारियों को पक्षकार ही नहीं बनाया गया।