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कामर्शियल कोर्ट की स्थापना पर चल रहा मंथन
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 01 Apr 2016 07:51 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : demo
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रियासत में कामर्शियल कोर्ट की स्थापना पर गहन विचार-विमर्श चल रहा है। हाईकोर्ट का कामर्शियल डिवीजन और कामर्शियल एपिलिएट कोर्ट के गठन पर भी मंथन चल रहा है। इन मुद्दों को चीफ जस्टिस कांफ्रेंस 2016 में रखा जाएगा, ताकि इन्हें मंजूरी मिल सके।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एमके हंजूरा ने इस संबंध में रियासत के सभी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को सूचित किया है कि चीफ जस्टिस कांफ्रेंस 2016 में कामर्शियल कोर्ट, कामर्शियल डिवीजन और कामर्शियल एपिलिएट की स्थापना के मुद्दों को अतिरिक्त मुद्दों के रूप में रखा गया है।
सभी जिला सत्र न्यायाधीश चार अप्रैल से पहले अपनी अधीनस्थ अदालतों के कुल केसों की संख्या से अवगत करवाएं, ताकि इसे कंपाइल कर चीफ जस्टिस कांफ्रेंस में रखा जा सके। उल्लेखनीय है कि रियासत की तमाम अदालतों में लंबित केसों के मामले भी चीफ जस्टिस कांफ्रेंस का अहम हिस्सा होंगे।
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सभी जिला सत्र न्यायाधीशों से उनकी अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों की रिपोर्ट मांगी गई है, जिसमें पांच वर्ष तक, पांच से दस वर्ष तक और दस से ज्यादा वर्षों तक लंबित मामलों की जानकारी मांगी गई है।
लंबित केसों को जल्द निपटारे की कवायद के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने भी विशेष निर्देश दिए हैं। साथ ही पेंडिंग केसों की संख्या के साथ रिपोर्ट कांफ्रेंस में रखने को कहा है।
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हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एमके हंजूरा ने इस संबंध में रियासत के सभी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को सूचित किया है कि चीफ जस्टिस कांफ्रेंस 2016 में कामर्शियल कोर्ट, कामर्शियल डिवीजन और कामर्शियल एपिलिएट की स्थापना के मुद्दों को अतिरिक्त मुद्दों के रूप में रखा गया है।
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सभी जिला सत्र न्यायाधीश चार अप्रैल से पहले अपनी अधीनस्थ अदालतों के कुल केसों की संख्या से अवगत करवाएं, ताकि इसे कंपाइल कर चीफ जस्टिस कांफ्रेंस में रखा जा सके। उल्लेखनीय है कि रियासत की तमाम अदालतों में लंबित केसों के मामले भी चीफ जस्टिस कांफ्रेंस का अहम हिस्सा होंगे।
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सभी जिला सत्र न्यायाधीशों से उनकी अदालतों में लंबे समय से लंबित मामलों की रिपोर्ट मांगी गई है, जिसमें पांच वर्ष तक, पांच से दस वर्ष तक और दस से ज्यादा वर्षों तक लंबित मामलों की जानकारी मांगी गई है।
लंबित केसों को जल्द निपटारे की कवायद के लिए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने भी विशेष निर्देश दिए हैं। साथ ही पेंडिंग केसों की संख्या के साथ रिपोर्ट कांफ्रेंस में रखने को कहा है।