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जम्मू में बोले टीएस ठाकुर 'एक-एक रुपये के इनाम ने मुख्य न्यायाधीश बनाया'

Sun, 04 Dec 2016 07:11 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 04 Dec 2016 07:11 PM IST
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CJI told the story of his childhood in jammu
मुख्य न्यायधीश टीएस ठाकुर - फोटो : अमर उजाला

जम्मू में एक कार्यक्रम करने पहुंचे देश के मुख्य न्यायधीश टीएस ठाकुर ने लोगों से अपने बचपन के अनुभव साझा किये। सीजेआई ठाकुर ने न सिर्फ बचपन की तमाम बातों का जिक्र किया बल्कि स्कूल के उस प्रेरक किस्से के बारे में भी बताया जिसने उनकी जिंदगी को बदल दिया।

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सीजेआई के अनुसार स्कूल की प्रार्थना सभा में बेहतर बोलने पर हेड मास्टर गोविंद रामकी ओर से विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने जमकर तारीफ करने और एक रुपया इनाम देने की घटना ने मुख्य न्यायाधीश तीर्थ सिंह ठाकुर की जिंदगी का दृष्टिकोण बदलकर रख दिया। इतना प्रोत्साहन मिला कि फिर वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में पहला स्थान आने लगा।
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कालेज में भी यही क्रम जारी रहा और डिबेट में अच्छा विद्यार्थी रहने का लाभ वकालत और फिर जज के रूप में मिला। अपने स्कूल सेंटर बेसिक का दौरा करने के बाद मुख्य न्यायाधीश के जीवन से जुड़े कई अनछुए पहलुओं को जानने का मौका मिला।  

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'मैं अच्छा भाषण देता हूं और यह मेरे स्कूल की देन है'

CJI told the story of his childhood in jammu
मुख्य न्यायधीश टीएस ठाकुर - फोटो : अमर उजाला

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि करीब पचास साल पहले स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या करीब 400 के करीब थी। 15 से बीस शिक्षक भी थे। इनाम और हौसलाअफजाई से ऐसा प्रोत्साहन मिला कि जीवन में आगे बढ़ता चला गया। उन्होंने अपने समय के उर्दू के शिक्षक और अन्य शिक्षकों की भी जमकर तारीफ की। 

उन्होंने कहा कि स्कूल के बाद साइंस कालेज में प्रवेश लिया और वाद-विवाद प्रतियोगिता में पहला स्थान पाया। राष्ट्रीय स्तर पर हुई वाद-विवाद प्रतियोगिता में भी अव्वल रहा। इसी बुनियाद पर कानूनी कॅरियर बना। अब सच का सच और झूठ का झूठ करने में जुटा हूं। अक्सर जज अच्छा भाषण नहीं देते। फैसले के माध्यम से अपने कौशल को बतलाते हैं, लेकिन मैं अच्छा भाषण देता हूं और यह मेरे स्कूल की देन है।

वहीं मुख्य न्यायाधीश के साथ पढ़े उनके सहपाठी अवतार सिंह के अनुसार मुख्य न्यायाधीश को स्कूल के दिनों में तीर्थ कहकर बुलाते थे और वह गंभीर विद्यार्थी रहे और पढ़ाई पर उनका ज्यादा ध्यान रहता था। हालांकि फिल्म देखने का उन्हें बेहद शौक था और ससुराल फिल्म उन्होंने एक साथ देखी। अन्य सहपाठी एमएल कोचर ने कहा वाद-विवाद में तीर्थ सिंह ठाकुर का कोई जवाब नहीं था। 

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