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Chenab Bridge: बोगीबील, पंबन ब्रिज समेत रेलवे के वो 5 बड़े प्रोजेक्ट, जिन्होंने दुनिया में मनवाया भारत का लोहा
Fri, 06 Jun 2025 10:56 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 06 Jun 2025 10:56 AM IST
सार
भारतीय रेलवे ने हाल के वर्षों में बोगीबील ब्रिज और पंबन ब्रिज समेत कई बड़े प्रोजेक्ट तैयार किए हैं, इन प्रोजेक्ट ने दुनिया में भारत का लोहा मनवाया है।
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रेलवे के पांच बड़े प्रोजेक्ट
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विस्तार
भारतीय रेलवे ने हाल के वर्षों में कई बड़े प्रोजेक्ट्स तैयार किए। इनसे न केवल देश की छवि बदली, बल्कि दुनिया ने भी भारत की तकनीकी क्षमताओं का लोहा माना। दुनिया का सबसे ऊंचा चिनाब रेलवे ब्रिज भी इसी उपलब्धि में हैं। 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित आर्च तकनीक पर बना यह पुल फ्रांस के एफिल टावर से भी ऊंचा है। 1315 मीटर इस ब्रिज की लंबाई है।
बोगीबील ब्रिज
एशिया का दूसरा सबसे लंबा रेल रोड ब्रिज है ये। असम के डिब्रूगढ़ में बना यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर और दक्षिण तट को जोड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2018 को इसका शुभारंभ किया था। इसकी सड़क पर लड़ाकू विमानों को भी उतारा जा सकता है। चीन की सीमा पर भारतीय सेना के साजो-सामान को आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
पंबन ब्रिज
यह एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज है। 2019 में नए पुल का निर्माण शुरू किया गया। इसकी लंबाई 2.8 किलोमीटर है। इसके 'लिफ्ट स्पैन' का आकार 72.5 मीटर लंबा, 16 मीटर चौड़ा और वजन 550 टन है। इसपर 535 करोड़ खर्च हुए। इसी साल अप्रैल में प्रधानमंत्री ने इस ब्रिज का लोकार्पण किया था।
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नीलगिरि पर्वतीय रेलवे
तमिलनाडु में स्थित नीलगिरि पर्वतीय रेलवे यात्रियों को सुंदर पहाड़ियों से गुजरते हुए एक शानदार यात्रा का अनुभव देती है। इसकी कुल लंबाई 46 किलोमीटर है। इसकी विशेषताओं में रैक एंड पिनियन प्रणाली है। यह तकनीक ट्रेन को खड़ी चढ़ाई पर चढ़ने में मदद करती है। भारत में केवल नीलगिरी रेलवे में ही इसका उपयोग होता है।
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बोगीबील ब्रिज
एशिया का दूसरा सबसे लंबा रेल रोड ब्रिज है ये। असम के डिब्रूगढ़ में बना यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तर और दक्षिण तट को जोड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2018 को इसका शुभारंभ किया था। इसकी सड़क पर लड़ाकू विमानों को भी उतारा जा सकता है। चीन की सीमा पर भारतीय सेना के साजो-सामान को आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
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पंबन ब्रिज
यह एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज है। 2019 में नए पुल का निर्माण शुरू किया गया। इसकी लंबाई 2.8 किलोमीटर है। इसके 'लिफ्ट स्पैन' का आकार 72.5 मीटर लंबा, 16 मीटर चौड़ा और वजन 550 टन है। इसपर 535 करोड़ खर्च हुए। इसी साल अप्रैल में प्रधानमंत्री ने इस ब्रिज का लोकार्पण किया था।
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नीलगिरि पर्वतीय रेलवे
तमिलनाडु में स्थित नीलगिरि पर्वतीय रेलवे यात्रियों को सुंदर पहाड़ियों से गुजरते हुए एक शानदार यात्रा का अनुभव देती है। इसकी कुल लंबाई 46 किलोमीटर है। इसकी विशेषताओं में रैक एंड पिनियन प्रणाली है। यह तकनीक ट्रेन को खड़ी चढ़ाई पर चढ़ने में मदद करती है। भारत में केवल नीलगिरी रेलवे में ही इसका उपयोग होता है।
भारतीय रेलवे का विद्युतीकरण
16 अप्रैल 1853 को भारत में पहली बार ट्रेन चली। तीन फरवरी 1925 को मुंबई के विक्टोरिया टर्मिनस से कुर्ला तक पहली विद्युत ट्रेन चली। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए भारत सरकार 100 रुपये का एक रंगीन स्मारक सिक्का जारी करने जा रही है। भारतीय रेलवे ने 2025 में रेल पथ विद्युतीकरण के 100 वर्ष पूरे किए हैं। इसके साथ ही भारत अपने ब्रॉडगेज नेटवर्क के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण की ओर अग्रसर है। यह उपलब्धि न केवल देश के तकनीकी विकास का प्रतीक है, बल्कि भारत के सतत परिवहन और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
16 अप्रैल 1853 को भारत में पहली बार ट्रेन चली। तीन फरवरी 1925 को मुंबई के विक्टोरिया टर्मिनस से कुर्ला तक पहली विद्युत ट्रेन चली। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए भारत सरकार 100 रुपये का एक रंगीन स्मारक सिक्का जारी करने जा रही है। भारतीय रेलवे ने 2025 में रेल पथ विद्युतीकरण के 100 वर्ष पूरे किए हैं। इसके साथ ही भारत अपने ब्रॉडगेज नेटवर्क के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण की ओर अग्रसर है। यह उपलब्धि न केवल देश के तकनीकी विकास का प्रतीक है, बल्कि भारत के सतत परिवहन और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
कोंकण रेलवे
कोंकण रेलवे पश्चिमी घाट के चुनौतीपूर्ण इलाकों से गुजरती हुई महाराष्ट्र और गोवा को जोड़ती है। यह रेलवे लाइन अपनी अनोखी इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषताओं के लिए जानी जाती है। कोंकण रेलवे की स्थापना 1990 में रेल मंत्रालय के एक स्पेशल पर्पज व्हीकल के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य चट्टानी पश्चिमी घाटों के जरिये रेलवे लाइनों के निर्माण के कठिन काम को पूरा करना था।
यह भी पढ़ें: Chenab Bridge: दस ऐसे प्रयोग... जो भारतीय रेलवे के इतिहास में पहले कभी नहीं हुए, वो यूएसबीआरएल टीम ने कर दिखाए
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