{"_id":"68426e84de8cf1bbab0aa4d0","slug":"jammu-news-udhampur-srinagar-baramulla-rail-link-project-chenab-bridge-news-innovations-in-indian-railways-2025-06-06","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Chenab Bridge: दस ऐसे प्रयोग... जो भारतीय रेलवे के इतिहास में पहले कभी नहीं हुए, वो यूएसबीआरएल टीम ने कर दिखाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chenab Bridge: दस ऐसे प्रयोग... जो भारतीय रेलवे के इतिहास में पहले कभी नहीं हुए, वो यूएसबीआरएल टीम ने कर दिखाए
Fri, 06 Jun 2025 10:24 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 06 Jun 2025 10:24 AM IST
सार
उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेलवे लिंक परियोजना में नए प्रयोगों की लंबी फेहरिस्त है, जो भारतीय रेलवे के इतिहास में कभी नहीं हुआ, वो यूएसबीआरएल की टीम ने कर दिखाया है।
विज्ञापन
10 ऐसे प्रयोग... जो पहले कभी नहीं हुए
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
272 किलोमीटर लंबे उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेलवे लिंक परियोजना का सबसे अहम पड़ाव चिनाब रेलवे ब्रिज है, 1315 मीटर लंबा यह पुल पूरे प्रोजेक्ट का सबसे कठिन और सबसे ज्यादा समय लेने वाला हिस्सा है। इस ब्रिज को बनाने के फैसले से लेकर उद्घाटन तक में 22 साल का समय लगा है। चिनाब रेलवे ब्रिज में नए प्रयोगों की लंबी फेहरिस्त है, जो भारतीय रेलवे के इतिहास में कभी नहीं हुआ, वो यूएसबीआरएल की टीम ने कर दिखाया है। आइए जानते हैं क्या हैं वो दस नए प्रयोग...
विज्ञापन
01
कंक्रीट को मजबूती देने को लिए स्टील फाइबर का किया इस्तेमाल
आरसीसी के बदले इस प्रोजेक्ट में स्टील फाइबर का इस्तेमाल किया गया। यह कंक्रीट की मजबूती व टिकाऊपन को बढ़ाता है। कंक्रीट की दरारों को भी यह कम करता है। यह भारी वजन को सहन करने में सक्षम बनाता है।
कंक्रीट को मजबूती देने को लिए स्टील फाइबर का किया इस्तेमाल
आरसीसी के बदले इस प्रोजेक्ट में स्टील फाइबर का इस्तेमाल किया गया। यह कंक्रीट की मजबूती व टिकाऊपन को बढ़ाता है। कंक्रीट की दरारों को भी यह कम करता है। यह भारी वजन को सहन करने में सक्षम बनाता है।
- स्टील फाइबर का इस्तेमाल गोदाम, कारखाने, विमान हैंगर, रनवे और मैनहोल बनाने में किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
02
बैलास्टलेस ट्रैक
यह गिट्टी रहित ट्रैक होता है, जिसे स्लैब ट्रैक भी कहते हैं। यह यात्रा को भी आरामदेह बनाता है। ट्रेन की गति को बढ़ाता है और इसमें मेंटेनेंस की जरूरत भी कम पड़ती है। कटड़ा-बनिहाल सेक्शन पर बैलास्टलेस ट्रैक ही बनाया गया है।
बैलास्टलेस ट्रैक
यह गिट्टी रहित ट्रैक होता है, जिसे स्लैब ट्रैक भी कहते हैं। यह यात्रा को भी आरामदेह बनाता है। ट्रेन की गति को बढ़ाता है और इसमें मेंटेनेंस की जरूरत भी कम पड़ती है। कटड़ा-बनिहाल सेक्शन पर बैलास्टलेस ट्रैक ही बनाया गया है।
03
स्ट्रेस रिलीफ होल्स
किसी भी तरह के तनाव को नियंत्रित करने के लिए यूएसबीआरल प्रोजेक्ट में स्ट्रेस रिलीफ होल्स का इस्तेमाल किया गया है। यह एक इनोवेशन है। वैसे सुरंग के निर्माण में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का इस्तेमाल किया जाता है। यूएसबीआरएल प्रोजेक्ट में बेहद साधारण और कम खर्च वाले एसआरएच का इस्तेमाल पहली बार किया गया।
स्ट्रेस रिलीफ होल्स
किसी भी तरह के तनाव को नियंत्रित करने के लिए यूएसबीआरल प्रोजेक्ट में स्ट्रेस रिलीफ होल्स का इस्तेमाल किया गया है। यह एक इनोवेशन है। वैसे सुरंग के निर्माण में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का इस्तेमाल किया जाता है। यूएसबीआरएल प्रोजेक्ट में बेहद साधारण और कम खर्च वाले एसआरएच का इस्तेमाल पहली बार किया गया।
04
निर्माणाधीन स्थल पर पहली बार एनएबीएल लैब की स्थापना की गई
इस प्रोजेक्ट के दौरान पहली बार किसी निर्माणाधीन स्थल पर एनएबीएल एक्रीडेशन टेस्टिंग लैब की स्थापना की गई। चिनाब ब्रिज पर लैब बनाई गई। दरअसल, प्रोजेक्ट बड़ा और दुरूह होने के कारण बाहर की लैब से निर्माण सामग्री की जांच कराना संभव नहीं था।
निर्माणाधीन स्थल पर पहली बार एनएबीएल लैब की स्थापना की गई
इस प्रोजेक्ट के दौरान पहली बार किसी निर्माणाधीन स्थल पर एनएबीएल एक्रीडेशन टेस्टिंग लैब की स्थापना की गई। चिनाब ब्रिज पर लैब बनाई गई। दरअसल, प्रोजेक्ट बड़ा और दुरूह होने के कारण बाहर की लैब से निर्माण सामग्री की जांच कराना संभव नहीं था।
05
हाइब्रिड फाउंडेशन
गगनचुंबी इमारतों में हाइब्रिड फाउंडेशन का इस्तेमाल करते हैं। बुर्ज खलीफा शंघाई और क्लॉक टावर इसी पर बना है। सुपरनोवा बिल्डिंग को भी इसी तकनीक पर बनाया गया है। इसी तर्ज पर वेल व पाइल फाउंडेशन का इस्तेमाल यूएसबीआरएल प्रोजेक्ट में हुआ है।
हाइब्रिड फाउंडेशन
गगनचुंबी इमारतों में हाइब्रिड फाउंडेशन का इस्तेमाल करते हैं। बुर्ज खलीफा शंघाई और क्लॉक टावर इसी पर बना है। सुपरनोवा बिल्डिंग को भी इसी तकनीक पर बनाया गया है। इसी तर्ज पर वेल व पाइल फाउंडेशन का इस्तेमाल यूएसबीआरएल प्रोजेक्ट में हुआ है।
- हवा के दबाव और ऊंचाई पर बनी इमारत के भार को सहने की क्षमता हाइब्रिड फाउंडेशन में होती है। यह नींव उन स्थानों पर उपयोगी है जहां मिट्टी कमजोर, ढीली या रेतीली होती है, और भूजल का स्तर अधिक होता है। इससे पूरे ढांचे के भार को नींव बड़े क्षेत्र में स्थानांतरित करने में सक्षम होती है, जिससे स्थिरता मिलती है।
06
डोका जंप शटरिंग से तैयार हुए अंजी ब्रिज के खंभे
डोका जंप शटरिंग के जरिये अंजी ब्रिज के पायलन यानी खंभे तैयार किए गए। ब्रिज को मजबूती देने के लिए केबल का इस्तेमाल किया गया है। यह आम शटरिंग से अलग होती है, इसमें हर चार-चार मीटर की लेयर बनाई गई थीं।
डोका जंप शटरिंग से तैयार हुए अंजी ब्रिज के खंभे
डोका जंप शटरिंग के जरिये अंजी ब्रिज के पायलन यानी खंभे तैयार किए गए। ब्रिज को मजबूती देने के लिए केबल का इस्तेमाल किया गया है। यह आम शटरिंग से अलग होती है, इसमें हर चार-चार मीटर की लेयर बनाई गई थीं।
07
प्रीलोडेड स्प्रिंग कैंपर्स
भारतीय रेलवे में पहली बार गति और कंपन को कम करने के लिए प्रीलोडेड स्प्रिंग डॅपर्स का इस्तेमाल किया गया। भूकंप के दौरान नियंत्रण बनाए रखने में इससे मदद मिलेगी। यह डिवाइस सीस्मिक एनर्जी के असर को कम कर देती है।
प्रीलोडेड स्प्रिंग कैंपर्स
भारतीय रेलवे में पहली बार गति और कंपन को कम करने के लिए प्रीलोडेड स्प्रिंग डॅपर्स का इस्तेमाल किया गया। भूकंप के दौरान नियंत्रण बनाए रखने में इससे मदद मिलेगी। यह डिवाइस सीस्मिक एनर्जी के असर को कम कर देती है।
08
पीएयूटी यानी फेज्ड ऐरे अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग
भारतीय रेलवे ने इस तकनीक का पहली बार चिनाब ब्रिज में इस्तेमाल किया। यह अत्याधुनिक तकनीक है, जिसका इस्तेमाल दरारों का पता लगाने में किया जाता है। यह भूकंपरोधी होती है।
पीएयूटी यानी फेज्ड ऐरे अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग
भारतीय रेलवे ने इस तकनीक का पहली बार चिनाब ब्रिज में इस्तेमाल किया। यह अत्याधुनिक तकनीक है, जिसका इस्तेमाल दरारों का पता लगाने में किया जाता है। यह भूकंपरोधी होती है।
09
इंटीग्रेटेड बीयरिंग
पहली बार भारतीय रेलवे ने इसका इस्तेमाल किया। अंजी ब्रिज के कुछ खंड पर इसका इस्तेमाल किया गया है। इंजीनियर बताते हैं कि इसका इस्तेमाला घर्षण को कम करने व गति देने को किया जाता है। अंजी ब्रिज पर इसे पुल के साथ ही फिक्स किया है, जो कहीं ज्यादा मजबूत है।
इंटीग्रेटेड बीयरिंग
पहली बार भारतीय रेलवे ने इसका इस्तेमाल किया। अंजी ब्रिज के कुछ खंड पर इसका इस्तेमाल किया गया है। इंजीनियर बताते हैं कि इसका इस्तेमाला घर्षण को कम करने व गति देने को किया जाता है। अंजी ब्रिज पर इसे पुल के साथ ही फिक्स किया है, जो कहीं ज्यादा मजबूत है।
10
नर्म जमीन पर टनल बनाने के लिए नया सिस्टम बनाया गया
न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) को नर्म जमीन पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। हिमालय की पहाड़ियों के बीच टी 33 टनल को बनाना सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा। यहां पर टनलिंग के नए सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।
यह भी पढ़ें: 2025: जम्मू-कश्मीर के इतिहास में बड़े संकल्पों के सिद्धियों वाला साल, रेल मंडल और टनल, आज पूरा होगा एक और सपना
नर्म जमीन पर टनल बनाने के लिए नया सिस्टम बनाया गया
न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) को नर्म जमीन पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। हिमालय की पहाड़ियों के बीच टी 33 टनल को बनाना सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा। यहां पर टनलिंग के नए सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।
यह भी पढ़ें: 2025: जम्मू-कश्मीर के इतिहास में बड़े संकल्पों के सिद्धियों वाला साल, रेल मंडल और टनल, आज पूरा होगा एक और सपना