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आतंकियों को फंडिंग मामले में दो ओवरग्राउंड वर्करों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
एजेंसी/जम्मू
Updated Sat, 18 Mar 2017 11:40 AM IST
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आतंकवादी
- फोटो : Demo Pic.
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आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन को पैसा सप्लाई करने पर दो आरोपियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। रियासत के डोडा जिले के रहने वाले मुबारक अली और इनायतुल्लाह वानी को कुछ वर्ष पूर्व पुलिस ने 5.4 लाख रुपये के साथ पकड़ा था। आरोप है कि यह पैसा घाटी में सक्रिय हिजबुल आतंकी गुलाम नबी उर्फ जावेद कुरैशी को सौंपा जाना था।
प्रीवेंशन आफ मनी लांडरिंग एक्ट (पीएमएलए) कोर्ट जम्मू में दाखिल की गई चार्जशीट में प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि अली और वानी आतंकी संगठन के ओवर ग्राउंड वर्कर्स हैं। डोडा जिले में आतंकी गतिविधियों को एक सोची-समझी साजिश के तहत बढ़ावा देने में लिप्त रहे दोनों आरोपी श्रीनगर में अज्ञात आतंकियों से पैसा लेकर खेप कुरैशी को देने जा रहे थे।
आरोपी अली एक लेबर कांट्रेक्टर है, जबकि वानी गांव की विलेज डिफेंस कमेटी का सदस्य रहा है। ईडी ने बरामद हुई राशि को आतंकी फंडिंग से जोड़ते हुए पीएमएलए के तहत संज्ञान लिया था। जांच का हवाला देते हुए ईडी ने कहा, अली ने पूछताछ में दावा किया था कि उससे बरामद पैसा वह उसके रिश्तेदार वानी के कैंसर के उपचार के लिए लेकर जा रहा था, लेकिन संबंधित डॉक्टर ने साफ कर दिया कि आरोपी को माउथ कैंसर है ही नहीं।
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साथ ही बताया, उसे जो उपचार दिया गया है वह पूरी तरह से नि:शुल्क है। डॉक्टर ने यह भी बताया कि यदि निजी क्लिनिक में भी उपचार कराया जाता है, तो अधिकतम 10 हजार रुपये का खर्च आएगा। पूछताछ के दौरान आरोपी इतनी बड़ी राशि का स्रोत बताने में नाकाम रहे।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा वित्तीय अपराध के किसी मामले पर चार्जशीट दाखिल करने का यह विरला मामला है। इससे पूर्व ईडी ने दिल्ली में 2005 में हुए बम धमाके के केस में तारिक अहमद डार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
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प्रीवेंशन आफ मनी लांडरिंग एक्ट (पीएमएलए) कोर्ट जम्मू में दाखिल की गई चार्जशीट में प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि अली और वानी आतंकी संगठन के ओवर ग्राउंड वर्कर्स हैं। डोडा जिले में आतंकी गतिविधियों को एक सोची-समझी साजिश के तहत बढ़ावा देने में लिप्त रहे दोनों आरोपी श्रीनगर में अज्ञात आतंकियों से पैसा लेकर खेप कुरैशी को देने जा रहे थे।
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आरोपी अली एक लेबर कांट्रेक्टर है, जबकि वानी गांव की विलेज डिफेंस कमेटी का सदस्य रहा है। ईडी ने बरामद हुई राशि को आतंकी फंडिंग से जोड़ते हुए पीएमएलए के तहत संज्ञान लिया था। जांच का हवाला देते हुए ईडी ने कहा, अली ने पूछताछ में दावा किया था कि उससे बरामद पैसा वह उसके रिश्तेदार वानी के कैंसर के उपचार के लिए लेकर जा रहा था, लेकिन संबंधित डॉक्टर ने साफ कर दिया कि आरोपी को माउथ कैंसर है ही नहीं।
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साथ ही बताया, उसे जो उपचार दिया गया है वह पूरी तरह से नि:शुल्क है। डॉक्टर ने यह भी बताया कि यदि निजी क्लिनिक में भी उपचार कराया जाता है, तो अधिकतम 10 हजार रुपये का खर्च आएगा। पूछताछ के दौरान आरोपी इतनी बड़ी राशि का स्रोत बताने में नाकाम रहे।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा वित्तीय अपराध के किसी मामले पर चार्जशीट दाखिल करने का यह विरला मामला है। इससे पूर्व ईडी ने दिल्ली में 2005 में हुए बम धमाके के केस में तारिक अहमद डार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।