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भ्रष्टाचार निरोधक संस्थाओं में स्टाफ की भारी कमी

Sun, 17 Aug 2014 10:36 AM IST
Updated Sun, 17 Aug 2014 10:36 AM IST
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chairman should remain in office till new appointment

कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की मंजूरी के लिए दायर जन हित याचिका के तहत ही दायर एक ताजा याचिका में भ्रष्टाचार निरोधक संस्थाओं में स्टाफ की कमी का मुद्दा कोर्ट के समक्ष पेश किया गया।

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शनिवार को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस वीरेंद्र सिंह और जस्टिस ताशी रबस्तान की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पाया कि 18 अगस्त 2014 को एहतिसाब आयोग के चेयरमैन और सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
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फिलहाल नये चेयरमैन और सदस्यों का चयन नहीं किया गया है। ऐसे में जनहित में रियासत सरकार नई नियुक्तियां होने तक मौजूदा चेयरमैन और सदस्यों को अपने पद पर काम करते रहने पर विचार करे।
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आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति का मसला

chairman should remain in office till new appointment

जब जनहित याचिका कोर्ट में सुनवाई के लिए आई थी उस दौरान जुलाई 2014 के आदेश के तहत कोर्ट ने पाया था कि जिन अहम मुद्दों की अलग से शिनाख्त की गई थी। उनमें एहतिसाब आयोग के चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति का मसला भी शामिल था जिनका कार्यकाल अगस्त 2014 में समाप्त हो रहा है।

कोर्ट ने पाया कि फिलहाल दो पूर्व जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू किए जाने को लेकर सरकार की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है। ऐसी कोई सूचना नहीं है कि सर्च कमेटी बनाकर दोनों पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इस पर यदि एहतिसाब आयोग के चेयरमैन और सदस्य की नियुक्ति नहीं की जाती तो आयोग निष्क्रिय हो जाएगा। इसके चलते कोर्ट की ओर से निद्रेश जारी किए जाते हैं कि दोनों चेयरमैन और सदस्य की नियुक्ति के लिए आवश्यक कदम जल्द उठाए जाएं।

मौजूदा सदस्यों को ही पदों पर बरकरार रखने के निर्देश

chairman should remain in office till new appointment

इस संबंध में गृह, कानून और सामान्य प्रशासनिक विभाग अगली सुनवाई से पहले विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे। ऐसा नहीं किए जाने की सूरत में कोर्ट को मौजूदा सदस्यों को ही पदों पर बरकरार रखने के निर्देश जारी करने होंगे जब तक कि नये चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति नहीं की जाती।

पीआईएल की पैरवी कर रहे एडवोकेट एसएस अहमद और सूरज सिंह, यूनियन आफ इंडिया की ओर से पेश एसजीआई केके पंगोत्रा, स्टेट की ओर से पेश  की दलीलों को सुनने के बाद पाया कि सरकार की ओर से इस मामले में 11 अगस्त 2014 तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश नहीं की गई थी।

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