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जवानों की आत्महत्या के मामले पर केंद्र सरकार गंभीर

Sun, 26 Mar 2017 02:05 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र,अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 26 Mar 2017 02:05 PM IST
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CENTRE BECAME SERIOUS ON SUICIDE OF TROOPS
गृह मंत्रालय - फोटो : File Photo

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पत्थरबाजी घटनाओं को रोजाना झेलने वाले जवानों में बढ़ रहे तनाव को गृह मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। सुरक्षा बलों के जवानों में आत्महत्याओं की घटनाएं रोकने के लिए केंद्र सरकार ने विशेष कैप्सूल कोर्स चलाने का निर्णय लिया है। जम्मू-कश्मीर में हर महीने औसतन तीन जवान आत्महत्याएं करते रहे हैं।

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आम तौर पर छुट्टियों से वापस आने के बाद आत्महत्याओं की घटनाएं होती हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जवानों को ड्यूटी के क्रम में तनाव मुक्त करने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। सूत्रों के मुताबिक पिछले साल कुल 98 जवानों ने आत्महत्याएं कीं। अकेले जम्मू-कश्मीर में 37 जवानों ने आत्महत्याएं की हैं।
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इससे पहले 2014 में 125 जवानों ने आत्महत्याएं की थीं। इसी तरह 2015 में 108 जवानों ने आत्महत्याएं कीं। जवानों में आपसी विवाद के कारण सहकर्मी जवान की हत्याएं करने के मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसी घटनाओं के लिए तनाव को ही जिम्मेदार माना गया है। दस्तावेजों के अनुसार 2014 में जवानों ने 7, 2015 में 6 और 2016 में 6 सहकर्मी जवानों का हत्याएं कीं। 

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जवानों से नियमित संवाद के भी निर्देश

CENTRE BECAME SERIOUS ON SUICIDE OF TROOPS
केंद्रीय गृह मंत्रालय - फोटो : फाइल फोटो

गृह विभाग मानता है कि जवानों में वैवाहिक विवाद के मामले, घरेलू विवाद, दुश्मनी, अवसाद और मानसिक बीमारियों के कारण आत्महत्या और सहकर्मी की हत्या की प्रवृत्ति जगती है। कई बार अवकाश संबंधी विवाद के कारण भी ऐसी घटनाएं होती रहीं हैं। इसलिए अफसरों को जवानों से नियमित संवाद के भी निर्देश दिए गए हैं।

कार्य के घंटों की समीक्षा की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। रहन- सहन की स्थिति में सुधार, मनोरंजन, खेलकूद और संचार की सुविधाओं में बढ़ोतरी के भी निर्देश हैं। बेहतर चिकित्सा सुविधा, मनोवैज्ञानिक समस्याओं के समाधान के अलावा योग शिविरों के नियमित आयोजन को कहा गया है। योग्य जवानों को समय पर प्रोन्नति और कठिन क्षेत्रों में तैनाती के दौरान विशेष प्रतिपूर्ति के आदेश जारी हुए हैं। 

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