{"_id":"5d487cc18ebc3e6cf13a34de","slug":"central-amendment-jammu-news-jmu1908409111","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना घोषणा के सड़कों पर पुलिस ने लगा दिया कर्फ्यू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना घोषणा के सड़कों पर पुलिस ने लगा दिया कर्फ्यू
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जम्मू। अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर एहतियात के तौर पर लिया गया सुरक्षा संबंधी फैसला लोगों के लिए मुसीबत बन गया। सोमवार को सुबह से ही सड़कों पर कंटीले तार लगाकर रास्तों को बंद कर दिया गया। प्रशासन की तरफ से घोषणा की गई थी कि सिर्फ धारा 144 लागू की गई है, लेकिन शहर में कर्फ्यू जैसे हालात रहे। मुख्य सड़क से जुड़ने वाली गलियों तक को तार लगाकर बंद कर दिया गया था। इसकी वजह से आवागमन में परेशानी आई। वहीं जांच-पड़ताल करने के बाद वाहन सवारों को आगे बढ़ने दिया जा रहा था। वहीं कुछ जगहों पर पुलिसकर्मियों ने राहगीरों से बदसलूकी तक कर दी।
पुराने शहर में सख्त पहरा रहा। हर गली में कंटीले तार लगाए लगाए गए थे। लोगों को घरों के बाहर तक नहीं निकलने दिया गया। जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन की तरफ से जम्मू शहर में सिर्फ नगर निगम के दायरे में धारा 144 लागू की गई थी, लेकिन पुलिस की तरफ से नगर निगम के दायरे के बाहर भी सभी जगहों पर कंटीले तार लगाकर सड़कों को बंद कर दिया गया। यहां तक कि बाइक से जाने वाले लोगों को भी रोका गया। शहर के सतवारी चौक, बिक्रम चौक, जानीपुर, गुज्जर नगर पुल, शहीदी चौक, खटीका तालाब आदि इलाकों में भी कंटीली तार लगाकर लोगों को आने जाने से रोक दिया गया।
घरों में नहीं पहुंचे अखबार तक बांटने नहीं दिए गए
सख्ती का आलम यह रहा कि घरों में अखबार तक नहीं पहुंचे। पुलिस कर्मियों ने अखबार ले जाने वाले वाहनों को जम्मू से आगे नहीं जाने दिया। हॉकरों का कहना था कि उन्हें आसपास के इलाकों में जाने से रोक दिया गया। इसकी वजह से वह अखबार नहीं बांट सके। उनका यह भी कहना था कि जब उन्होंने पुलिस कर्मियों से बात करनी चाही, तो पुलिस ने उनसे बदसलूकी भी की।
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पहला दिन था, सख्ती बरतनी पड़ी
नगर निगम केे दायरे में 144 लागू की गई थी। रही बात सख्ती की तो पहला दिन था। इसलिए एहतियात के तौर पर जहां कुछ होने की आशंका थी। वहां सख्ती करनी पड़ी। आगे के हालत पर बैठक होगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि धारा 144 कब तक रहेगी।
-सुषमा चौहान, उपायुक्त, जम्मू
कुछ इलाकों में सख्ती की आवश्यकता थी
कर्फ्यू तो कहीं पर नहीं लगाया गया। लेकिन कुछ इलाके हैं, जहां पर अधिक सख्ती की जरूरत थी। इसलिए वहां से किसी को आने जाने की अनुमति नहीं दी गई। शहर के दक्षिणी इलाके में इतनी सख्ती नहीं थी। लोगों को आने जाने दिया जा रहा था। भविष्य में क्या करना है। इसका फैसला उच्च स्तरीय बैठक में होगा।
-मुकेश सिंह, आईजी, जम्मू
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बिना बताए 144 लगा दी
मैं तो अपने काम से निकला था। देखा कि सड़कों पर कई जगह कंटीले तार लगा दिए हैं। सुरक्षाकर्मी आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे। कम से कम पहले बताना चाहिए कि कहीं आने जाने की अनुमति नहीं है। एकदम से आदेश लागू होने से परेशानी तो होती ही है।
-अरुण, नानक नगर
...लेकिन पुलिसकर्मी ने नहीं जाने दिया
जरूरी काम से कहीं जाना था। पुलिसकर्मी से मैंने कहा कि कुछ काम है। वैसे भी धारा 144 में तो अकेला शख्स कहीं भी जा सकता है। लेकिन पुलिसकर्मी ने आगे नहीं बढ़ने दिया। ऊपर से बदसलूकी की।
-हैपी, शास्त्री नगर
धारा 144, हालात कर्फ्यू जैसे दिखे
प्रशासन ने धारा 144 लगाई थी। लेकिन पुलिसकर्मियों ने बर्ताव ऐसे किया जैसे कर्फ्यू लगा हो। कम से कम पुलिस कर्मियों को आदेश होना चाहिए कि वह दोनों की परिभाषा को समझें।
-करण, सोनू
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पुराने शहर में सख्त पहरा रहा। हर गली में कंटीले तार लगाए लगाए गए थे। लोगों को घरों के बाहर तक नहीं निकलने दिया गया। जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन की तरफ से जम्मू शहर में सिर्फ नगर निगम के दायरे में धारा 144 लागू की गई थी, लेकिन पुलिस की तरफ से नगर निगम के दायरे के बाहर भी सभी जगहों पर कंटीले तार लगाकर सड़कों को बंद कर दिया गया। यहां तक कि बाइक से जाने वाले लोगों को भी रोका गया। शहर के सतवारी चौक, बिक्रम चौक, जानीपुर, गुज्जर नगर पुल, शहीदी चौक, खटीका तालाब आदि इलाकों में भी कंटीली तार लगाकर लोगों को आने जाने से रोक दिया गया।
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घरों में नहीं पहुंचे अखबार तक बांटने नहीं दिए गए
सख्ती का आलम यह रहा कि घरों में अखबार तक नहीं पहुंचे। पुलिस कर्मियों ने अखबार ले जाने वाले वाहनों को जम्मू से आगे नहीं जाने दिया। हॉकरों का कहना था कि उन्हें आसपास के इलाकों में जाने से रोक दिया गया। इसकी वजह से वह अखबार नहीं बांट सके। उनका यह भी कहना था कि जब उन्होंने पुलिस कर्मियों से बात करनी चाही, तो पुलिस ने उनसे बदसलूकी भी की।
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पहला दिन था, सख्ती बरतनी पड़ी
नगर निगम केे दायरे में 144 लागू की गई थी। रही बात सख्ती की तो पहला दिन था। इसलिए एहतियात के तौर पर जहां कुछ होने की आशंका थी। वहां सख्ती करनी पड़ी। आगे के हालत पर बैठक होगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है कि धारा 144 कब तक रहेगी।
-सुषमा चौहान, उपायुक्त, जम्मू
कुछ इलाकों में सख्ती की आवश्यकता थी
कर्फ्यू तो कहीं पर नहीं लगाया गया। लेकिन कुछ इलाके हैं, जहां पर अधिक सख्ती की जरूरत थी। इसलिए वहां से किसी को आने जाने की अनुमति नहीं दी गई। शहर के दक्षिणी इलाके में इतनी सख्ती नहीं थी। लोगों को आने जाने दिया जा रहा था। भविष्य में क्या करना है। इसका फैसला उच्च स्तरीय बैठक में होगा।
-मुकेश सिंह, आईजी, जम्मू
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बिना बताए 144 लगा दी
मैं तो अपने काम से निकला था। देखा कि सड़कों पर कई जगह कंटीले तार लगा दिए हैं। सुरक्षाकर्मी आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे। कम से कम पहले बताना चाहिए कि कहीं आने जाने की अनुमति नहीं है। एकदम से आदेश लागू होने से परेशानी तो होती ही है।
-अरुण, नानक नगर
...लेकिन पुलिसकर्मी ने नहीं जाने दिया
जरूरी काम से कहीं जाना था। पुलिसकर्मी से मैंने कहा कि कुछ काम है। वैसे भी धारा 144 में तो अकेला शख्स कहीं भी जा सकता है। लेकिन पुलिसकर्मी ने आगे नहीं बढ़ने दिया। ऊपर से बदसलूकी की।
-हैपी, शास्त्री नगर
धारा 144, हालात कर्फ्यू जैसे दिखे
प्रशासन ने धारा 144 लगाई थी। लेकिन पुलिसकर्मियों ने बर्ताव ऐसे किया जैसे कर्फ्यू लगा हो। कम से कम पुलिस कर्मियों को आदेश होना चाहिए कि वह दोनों की परिभाषा को समझें।
-करण, सोनू