केंद्र ने सप्ताह भर पहले ही ले लिया था फैसला, गवर्नर और राम माधव की मुलाकात में तय हो गई थी तारीख
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की सरकार से समर्थन वापस लेकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक संदेश देने का मास्टर स्ट्रोक खेला है। भाजपा ने महसूस किया कि सत्ता की लालच से ऊपर देश सुरक्षा को प्राथमिकता 2019 में उसके लिए संजीवनी बन सकती है। लिहाजा एक झटके में महबूबा से नाता तोड़ लिया गया। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती जब सप्ताह भर पहले जम्मू में इफ्तार पार्टी दे रही थी तब दिल्ली में उनकी सरकार की किस्मत लिखी जा रही थी। केंद्र के फैसले के बाद पिछले मंगलवार को ही भाजपा महासचिव राम माधव ने श्रीनगर में गवर्नर एनएन वोहरा से मुलाकात की। उसी मुलाकात में राज्यापाल शासन की तारीख तय कर दी गई।
भाजपा के सूत्रों के मुताबिक यह महज संयोग नहीं है कि भाजपा के बड़े नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने महबूबा की इफ्तार पार्टी से दूरी बनाई। इसके लिए आलाकमान ने बकायदा निर्देश जारी किए थे। महबूबा की पार्टी के दूसरे दिन ही राम माधव ने कश्मीर में अपने सहयोगी दल पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन के आवास पर इफ्तार पार्टी में शिरकत कर कश्मीर का अपना अगामी एजेंडा भी जाहिर कर दिया। इन नई रणनीति में भाजपा अब कश्मीर में पीडीपी को कोसेगी और सज्जाद लोन के बूते जनाधार बढ़ाने की कवायद तेज होगी।
भाजपा सूत्र मानते हैं कि पार्टी के लिए जम्मू और लद्दाख की तीन सीटों से अधिक पूरे देश में एक सख्त संदेश देना जरूरी हो गया था। पाकिस्तान द्वारा लगातार सीजफायर का उल्लंघन और घाटी में लगातार बढ़ रहे आतंकी हमलों के बाद पार्टी की छवि देश भर में प्रभावित हो रही थी। भाजपा ने ताजा कदम से चेहरे पर जम रही काली धूल को झाड़ने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेन्द्र सिंह ने अमर उजाला से कहा कि हमने पीडीपी के साथ रहकर भी अपने सिंद्धांतों से समझौता नहीं किया। रमजान के दौरान एक तरफा सीजफायर धार्मिक सद्भाव के तहत लिया फैसला था। हमने एक मौका दिया जिसके प्रति सकारात्मक रिस्पांस नहीं आया। लिहाजा राष्ट्रहित में सत्ता को तिलांजलि दी गई। पीडीपी के दवाब के बावजूद अलगाववादियों से बातचीत नहीं की गई और एजेंडा आफ एलांयस के नाम पर पीडीपी अपने एजेंडा लागू करवाने में विफल रही।
केंद्रीय वार्ताकार से नहीं ली सलाह
कश्मीर में अमन बहाली के लिए नरम नीति की वकालत करने वाले केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा से इस बार कोई सलाह नहीं ली गई। शर्मा की सलाह पर 10 हजार पत्थरबाजों से मुकदमे की वापसी और एकतरफा सीजफायर जैसे कदम उठाए गए लेकिन गवर्नर शासन पर उनसे राय नहीं ली गई। वार्ताकार फिलहाल कश्मीर में हैं और इसी बीच गवर्नर सासन का निर्णय ले लिया गया। वार्ताकार को अब केंद्र से नए दिशानिर्देश मिल सकते हैं।
देश की सुरक्षा से समझौता नहीं : जितेन्द्र
पीडीपी में हो सकता है विभाजन