Census : जम्मू कश्मीर में नए स्वरूप में होगी जनगणना, आबादी में हो सकती है 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
यह जनगणना कई मायने में महत्वपूर्ण होगी और नए स्वरूप में सामने आएगी। माना जा रहा है कि नए सिरे से होने वाली जनगणना में 20 से 30 प्रतिशत तक की जनसंख्या वृद्धि हो सकती है।
विस्तार
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी अक्तूबर 2026 में जनगणना होगी। यह जनगणना कई मायने में महत्वपूर्ण होगी और नए स्वरूप में सामने आएगी। दरअसल अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद प्रदेश से बाहर के निवासियों को भी अधिकार प्राप्त हैं। ऐसा माना जा रहा है कि नए सिरे से होने वाली जनगणना में 20 से 30 प्रतिशत तक की जनसंख्या वृद्धि हो सकती है।
देशभर के साथ जम्मू कश्मीर में 13 साल बाद जनगणना होने जा रही है। वर्ष 2011 की जनगणना में जम्मू कश्मीर में 1.25 करोड़ जनसंख्या थी। इससे पहले वर्ष 2001 में 1.01 करोड़ जनसंख्या रही। वर्ष 2019 के बाद जम्मू कश्मीर में नए बदलाव हुए हैं। अब यह राज्य के बजाय केंद्र शासित प्रदेश है और लद्दाख, जम्मू कश्मीर का हिस्सा न होकर अलग से एक केंद्र शासित प्रदेश है।
जम्मू कश्मीर में वर्तमान में बाहरी लोगों को जमीन खरीदने, उद्योग लगाने, वोट डालने, डोमिसाइल बनवाने आदि के अधिकार प्राप्त हैं। गत मार्च में जम्मू कश्मीर की विधानसभा में हुए बजट सत्र में सरकार ने प्रदेश में 83 हजार से अधिक बाहरी लोगों को डोमिसाइल देने की जानकारी दी थी, यानी यहां जो बस गए हैं, वे जम्मू कश्मीर की जनगणना का हिस्सा बनेंगे। नई जनगणना में स्पष्ट हो जाएगा कि जम्मू कश्मीर पुुनर्गठन के बाद जनसांख्यिकी स्तर पर जम्मू कश्मीर में कितना बदलाव आया है। जनगणना में बाहरी लोगों के शामिल होने से जनसंख्या आंकड़ा बढ़ना लाजमी है।
वर्ष 2011 की जनगणना एक नजर
राजधानी जम्मू जिले की बात करें तो 2011 में जिले की जनसंख्या 1,529,958 थी, जिसमें पुरुष और महिलाएं क्रमशः 813,821 और 716,137 थीं। इससे पहले 2001 की जनगणना में जम्मू की जनसंख्या 1,357,077 थी, जिसमें पुरुष 727,738 और शेष 629,339 महिलाएं थीं। 2001 की तुलना में 2011 की जनसंख्या में 12.74 प्रतिशत का परिवर्तन हुआ था। जबकि भारत की पिछली जनगणना 2001 में जम्मू जिले की जनसंख्या में 1991 की तुलना में 29.01 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। जिला मुख्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में घरों में युवाओं की जनसंख्या करवाई जा रही है। जिसमें उनके रोजगार और बेरोजगारी का ब्योरा लिया जा रहा है।
वहीं, 2011 की जनगणना के अनुसार राजधानी श्रीनगर शहर की जनसंख्या 12,19,516 और श्रीनगर शहरी समूह की जनसंख्या 1,236,829 थी। शहर और शहरी समूह दोनों की औसत साक्षरता दर लगभग 71 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय औसत 74.04 प्रतिशत है। शहर और शहरी समूह दोनों की बाल जनसंख्या कुल जनसंख्या का लगभग 12 प्रतिशत, पुरुषों की 53.0 प्रतिशत और महिलाओं की संख्या 47.0 प्रतिशत है। शहरी क्षेत्र में लिंग अनुपात 1000 पुरुषों पर 888 महिलाएं हैं, जबकि शहरी समूह में यह 1000 पर 880 है, जबकि इस अनुपात का राष्ट्रव्यापी 940 है। श्रीनगर में 95 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। हिंदुओं की आबादी 4 प्रतिशत और शेष 1 प्रतिशत सिख, बौद्ध और जैन का प्रतिनिधित्व करती हैं।
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