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राजेंद्र सिंह का शहीदी दिवस मनाया
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celebrated Martyrdom Day of Martyr Rajendra Singh
- फोटो : SAMBA
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विजयपुर। कश्मीर के रक्षक महावीर चक्र शहीद ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह का शहीदी दिवस उनके गांव पैतृक गांव राजिंद्र सिंह पुरा (बगुना) में मनाया गया। इस मौके पर नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुरजीत सिंह सलाथिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। सभी ने शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
शहीदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में नेकां नेता सलाथिया ने शहीद राजिंद्र सिंह को देश का वीर सपूत बताया और कहा कि राजेंद्र सिंह ने जान पर खेल कर कश्मीर को कबायली हमले से बचाया था। 1947 में कश्मीर को पाकिस्तानी हमलावरों के हाथों घिरने से बचाया और दुश्मन से लड़ते हुए अपनी जान दे दी थी।
एक ब्रिगेडियर होने के बावजूद सिंह ने एक आर्मी जनरल की भूमिका निभाई और 120 सैनिकों के साथ पाकिस्तानी हमलावरों को तीन दिनों तक घाटी में घुसने से रोके रखा था। शहीद ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी इस बहादुरी के लिए स्वतंत्र भारत में पहला महा वीर चक्र मिला था।
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आसपास के गांवों के युवा भी सेना में भर्ती होने के लिए उतावले रहते हैं। ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह का बलिदान उनके लिए प्रेरणा है। ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह का जन्म 14 जून 1899 को सांबा जिले के गांव बगूना में सूबेदार लक्खा सिंह के घर हुआ था। शौर्य और वीरता का गुण उन्हें विरासत में मिला था। इस दौरान पंचों-सरपंचों और गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
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शहीदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में नेकां नेता सलाथिया ने शहीद राजिंद्र सिंह को देश का वीर सपूत बताया और कहा कि राजेंद्र सिंह ने जान पर खेल कर कश्मीर को कबायली हमले से बचाया था। 1947 में कश्मीर को पाकिस्तानी हमलावरों के हाथों घिरने से बचाया और दुश्मन से लड़ते हुए अपनी जान दे दी थी।
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एक ब्रिगेडियर होने के बावजूद सिंह ने एक आर्मी जनरल की भूमिका निभाई और 120 सैनिकों के साथ पाकिस्तानी हमलावरों को तीन दिनों तक घाटी में घुसने से रोके रखा था। शहीद ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी इस बहादुरी के लिए स्वतंत्र भारत में पहला महा वीर चक्र मिला था।
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आसपास के गांवों के युवा भी सेना में भर्ती होने के लिए उतावले रहते हैं। ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह का बलिदान उनके लिए प्रेरणा है। ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह का जन्म 14 जून 1899 को सांबा जिले के गांव बगूना में सूबेदार लक्खा सिंह के घर हुआ था। शौर्य और वीरता का गुण उन्हें विरासत में मिला था। इस दौरान पंचों-सरपंचों और गणमान्य लोगों ने भाग लिया।