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पाक गोलाबारी से छिन रही बासमती की खुशबू
राघवेंद्र नारायण मिश्र/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 19 Aug 2014 11:44 AM IST
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भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से। बासमती के खेतों को पाकिस्तान की नजर लग गई है। सीमा के सैकड़ों एकड़ खेत इस बार घास का मैदान बनकर रह गए। पाकिस्तान ने धान की रोपाई से पहले ही गोलाबारी शुरू कर दी थी। नतीजतन तारबंदी से सटे खेतों में इस बार बासमती की फसल नहीं दिखती।
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गांव के पास के खेतों में रोपाई तो हुई लेकिन अब पाकिस्तान के मोर्टार किसानों को फसल की देखभाल से रोक रहे हैं। आरएसपुरा और अरनियां के इलाके में तीन दिनों लगातार हो रही पाक गोलाबारी से लोगबाग घरों में दुबकने को मजबूर हो गए हैं। गांवों में पलायन की स्थिति पैदा हो गई है। रिहायशी इलाके में पाकिस्तानी गोलों के खौफ लोगों के दिन का चैन और रात की नींद छीन ली है।
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आरएसपुरा के बासमती की धमक विदेशों तक है लेकिन अब दहशत में जी रहे किसान सुरक्षा के लिए गांव छोड़ने का मन बना रहे हैं। कारोटोना खुर्द गांव के नम्बरदार जगमीत सिंह फौज से रिटायर हुए हैं, उनकी आंखों में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा सहज ही देखा जा सकता है। अस्सी वर्षीय इस रिटायर फौजी ने बताया कि तीन साल में एक दर्जन परिवार गांव छोड़ कर जा चुके हैं।
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लगभग दो सौ परिवारों के इस गांव में पाक गोलाबारी के डर से तीन रात से लोगों ने रतजगा किया है। रविवार को पाकिस्तान ने हद ही कर दी जब रात के एक बजे से सुबह साढ़े छह बजे तक लगातार गोले बरसाए। पाकिस्तानी गोले के धमाके रात भर गूंजते रहे। किसी के घर की छत टूट गई तो कहीं दीवार में सुराख बनाता गोला घरों के अंदर घुस आया। अरनियां में मवेशियों पर पाक गोले का कहर बरपा।
दहशत के मारे किसान दिन को खेतों पर काम करने नहीं गए। इस गांव में बीएसएफ की पोस्ट है। कमांडर ने ग्रामीणों को एहतियात बरतने की सलाह दी है। प्रशासन की नींद देर से खुली और उनका अमला दोपहर बाद ही गांव पहुंचा। अरुणाचल की तमांग सीमा पर तैनात फौजी जसबीर सिंह छुट्टियों में अपने गांव आए हैं। उनका मानना है कि पाकिस्तान गोलाबारी कर बीएसएफ का ध्यान बंटाता है और दूसरी तरफ से आतंकियों की खेप भारतीय सीमा में दाखिल करा देता है।
इस गांव पाकिस्तानी सीमा महज आधा किलोमीटर दूर भी नहीं है। पाक की नंदपुर अग्रिम चौकी साफ दिखती है। यहां पाक ने कतार से पेड़ लगा लिए हैं ताकि उस पार से छिपकर गोलाबारी की आड़ में घुसपैठ कराई जा सके। किसान देशराज सिंह कहते हैं कि खेतों में पाक गोलों से बड़े-बड़े गड्ढ़े बन गए हैं। कई मोर्टार खेतों में पड़े हैं जो दग नहीं सके इन्हें खोजकर निष्क्रिय करना बीएसएफ के लिए भी चुनौती है।
अब्दुल्लियां गांव हर साल पाकिस्तानी गोलों का शिकार बनता है। इस बार भी एक दर्जन घरों की दीवारें और छतें पाक की नापाक हरकत के साक्षी बने हैं। इस गांव के केवल कृष्ण कहते हैं कि पहले पाकिस्तान छोटी बंदूकों से गोलियां दागता था लेकिन अब बड़े गोले बरस रहे हैं।
चौधरी गंगाराम गांव के एकमात्र बंकर को सुरक्षा के लिए नाकाफी मानते हैं। सीमा के उस पार पाक का स्वर्गपुर पोस्ट इस पार मौत बरसाती है। गांव तीन तरफ से पाकिस्तानी सीमा से घिरा है। लिहाजा तितरफा गोलाबारी इसे लगातार छलनी करती है।