अरनिया सैक्टर की तीन पोस्टों पर की गई फायरिंग
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सुबह करीब बारह बजे वाला कोट सेक्टर में ही पाकिस्तान की बगीचा पोस्ट से भारतीय सेना की तिरकुंडी पोस्ट के पास पेट्रोलिंग पार्टी पर पाक ने फायरिंग की। जिससे सेना की 6 राजपूत रेजीमेंट का एक जवान राम घायल हो गया।
सेना ने भी फायरिंग का मुंहतोड़ उत्तर दिया और दो घंटे तक रुक-रुक कर फायरिंग होती रही। पाक ने हल्के आटोमेटिक हथियारों का प्रयोग किया। घायल जवान को राजोरी के सेना अस्पताल में रेफर कर दिया गया है।
घुसपैठ के रूटों पर विशेष गश्त शुरू
भारत और पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे घुसपैठ के लिए कुख्यात दरियाई रूटों पर ताबड़तोड़ गश्त शुरू हो गई है। बीती रात को सेना और पुलिस ने व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान चलाया। इससे संदिग्ध देखे जाने की अफवाहों ने जोर पकड़ लिया।
रात के बाद दिन के समय भी संदिग्धों की हलचल पर चर्चाएं गर्म रहीं लेकिन पुलिस ने साफ कर दिया कि संदिग्ध देखे जाने की कोई पुख्ता सूचना नहीं है। तरनाह नाला पाकिस्तानी घुसपैठ का सबसे कुख्यात रूट रहा है।
एसएसपी कठुआ मोहन लाल ने बताया कि भारत और पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से जम्मू पठानकोट नेशनल हाईवे तक के इलाके में दरियाई नाले कड़ी निगरानी में लाए गए हैं।
अरनिया सेक्टर में फायरिंग पर उन्होंने कहा कि कठुआ जिला हाई अलर्ट पर है।
गोलाबारी से ग्रामीणों का जीना मुहाल
पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय चौकियों और सीमांत गांवों को निशाना बनाए जाने के बावजूद केंद्र सरकार द्वारा कड़ा रुख नहीं अपनाए जाने से लोगों में रोष है। लोगों ने पुराने पिंड चौक पर केंद्र सरकार का पुतला जलाया और गुस्से का इजहार किया। ग्रामीणों ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से भारतीय चौकियों और सीमा के पास बसे गांवों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं केंद्र सरकार इस पर चुप है, जबकि गोलाबारी से सीमांत ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है।
गोलाबारी से सताने लगी रोटी की चिंता
पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी से सीमावर्ती किसानों को सबसे ज्यादा दिक्कतें पेश आ रही हैं। वह समय पर खेतीबाड़ी तक नहीं कर पा रहे।
सहमे-सहमे खेतों में काम करना उनकी मजबूरी बन गई है। बदले हालात में एक बार फिर उन्हें यह चिंता सताने लगी है कि कहीं गोलाबारी की वजह से रोटी के लाले न पड़ जाएं।
सीमांत गांव सुचेतगढ़ के हवेली राम, सरपंच सवर्ण लाल भगत, रमेश लाल का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा अकारण गोलाबारी करने से सीमांत ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि फायरिंग के चलते लोगों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है।
न बने बंकर, न मिले प्लाट
अब्दुल्लिया गांव के अवतार सिंह, मोहन लाल, पूर्व सरपंच जागर सिंह, उत्तम सिंह का कहना है कि उनकी कोई सुध नहीं ले रहा।
यहां तक चुनावों से पहले पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात कहने वाली भारतीय जनता पार्टी के नेता भी अब कुछ नहीं बोल रहे। गोलाबारी पर केंद्र सरकार की तरफ से विरोध जताने तक की बात सामने नहीं आई।
राज्य सरकार के किसी मंत्री ने भी ग्रामीणों की सुध नहीं ली है। इससे सभी दहशत में हैं। सीमांत क्षेत्र के किसान तारबंदी के आगे खेतीबाड़ी तक नहीं कर पा रहे।
अगर सीमा पर इसी तरह के हालात रहे, तो क्षेत्र के ग्रामीणों को रोटी के लिए भी तरसना पड़ेगा।