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जीएमसी की पूर्व प्रिंसिपल के खिलाफ केस दर्ज
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 10 Dec 2015 10:34 PM IST
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जीएमसी की पूर्व प्रिंसिपल डा. शशि गुप्ता के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार सिंबल कैंप निवासी सुरजीत सिंह द्वारा दर्ज शिकायत को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने क्राइम ब्रांच को भेजी।
शिकायत में कहा गया कि जीएमसी के प्रिंसिपल पद पर तैनाती के दौरान डा. शशि गुप्ता सरकारी फंड का दुरुपयोग किया। जीएमसी में लेक्चरर के रूप में ज्वाइन करने के तत्काल बाद आरोपी ने चार दिन की कैजुअल लीव ली और चार साल दस माह 20 दिन की छुट्टी पर रहीं।
वह विदेश चली गईं और लौटने पर न सिर्फ उन्हें वापस ज्वाइन करवाया गया, बल्कि उन्हें प्रमोशन भी दे दिया गया। उनकी अनुपस्थिति की अवधि को सरकारी आदेश के अनुसार डाइसनन के रूप में माना गया।
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लोक सेवा आयोग की ओर से उन्हें 23 अप्रैल 1995 से नोशनल आधार पर और 26 जुलाई 1996 से नियमित आधार पर माना गया। सरकार ने उन्हें 23 अप्रैल 1994 से प्रमोशन प्रदान की, जो पीएससी के अनुमोदन का उल्लंघन है।
जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने पाया कि जीएमसी की प्रिंसिपल के दौरान डा. शशि गुप्ता और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अनियमितता बरती। प्रथम दृष्टया में उनके खिलाफ आरपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और पीसी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
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शिकायत में कहा गया कि जीएमसी के प्रिंसिपल पद पर तैनाती के दौरान डा. शशि गुप्ता सरकारी फंड का दुरुपयोग किया। जीएमसी में लेक्चरर के रूप में ज्वाइन करने के तत्काल बाद आरोपी ने चार दिन की कैजुअल लीव ली और चार साल दस माह 20 दिन की छुट्टी पर रहीं।
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वह विदेश चली गईं और लौटने पर न सिर्फ उन्हें वापस ज्वाइन करवाया गया, बल्कि उन्हें प्रमोशन भी दे दिया गया। उनकी अनुपस्थिति की अवधि को सरकारी आदेश के अनुसार डाइसनन के रूप में माना गया।
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लोक सेवा आयोग की ओर से उन्हें 23 अप्रैल 1995 से नोशनल आधार पर और 26 जुलाई 1996 से नियमित आधार पर माना गया। सरकार ने उन्हें 23 अप्रैल 1994 से प्रमोशन प्रदान की, जो पीएससी के अनुमोदन का उल्लंघन है।
जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने पाया कि जीएमसी की प्रिंसिपल के दौरान डा. शशि गुप्ता और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अनियमितता बरती। प्रथम दृष्टया में उनके खिलाफ आरपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और पीसी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई।