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Jammu News: जम्मू में सैलानी रुकेंगे तो ही हरि मार्केट में खरीदारी करेंगे
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- कारोबारी बोले, जम्मू को पर्यटन के तौर पर विकसित करे सरकार
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। देशभर से जम्मू में आने वाले पर्यटकों से कभी गुलजार रहने वाला मशहूर हरि मार्केट का हाल आज विपरीत हैं। दुकानदारों का कहना है कि अगर पर्यटक जम्मू में रुकेंगे तो ही खरीदारी करेंगे। अब तो टूरिस्ट दिल्ली से ट्रेन पकड़ते हैं और सीधे कटड़ा या श्रीनगर पहुंच जाते हैं। घूमकर वहीं से वापस चले जाते हैं।
हरि मार्केट में ड्राईफ्रूट का कारोबार करने वाले राजेश शर्मा और सतीश गुप्ता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार को जम्मू शहर में पर्यटकों को रोकने का इंतजाम करना होगा। आरएस पुरा के सुचेतगढ़ बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी होती है, उस स्थल को विकसित किया जा सकता है। अमृतसर के अटारी बॉर्डर पर भी रिट्रीट देखने देशभर से लोग पहुंचते हैं। कारोबारियों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से भी मांग है कि जम्मू को पर्यटन के तौर पर विकसित किया जाए। जम्मू में आखिर कितने पर्यटन स्थल हैं। यहां सैलानी क्यों रुकेंगे। दिल्ली से सीधा कटड़ा और श्रीनगर के लिए वंदे भारत ट्रेन शुरू हो जाने से पर्यटक अब जम्मू में रुकते ही नहीं हैं।
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ड्राईफ्रूट की दुकानें हैं
हरि मार्केट की पहचान
दुकानों के बाहर रखीं अखरोट और बादाम की बोरियां प्राचीन हरि मार्केट की पहचान हैं। इस बाजार में ज्यादातर ड्राईफ्रूट और कढ़ाई वाले शॉल की दुकानें हैं। खिलौने और जूतों की दुकान भी है। स्थानीय कारोबारियों ने बताया कि यह मार्केट 1970 में डॉ. कर्ण सिंह ने बसाई थी।
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32 साल हो गए कारोबार करते। अब व्यापार उतना रह नहीं गया। जम्मू में बहुत ही कम पर्यटक आते हैं। हर दिन किराये की राशि निकालना मुश्किल हो गया है। सरकार को इंतजाम करने चाहिए कि पर्यटक जम्मू में भी रुकें और बाजारों में खरीदारी कर पाएं।
- सुरेश कुमार, शॉल कारोबारी, हरि मार्केट
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सरकार को गंभीरता से इस विषय पर सोचना होगा। पर्यटक जम्मू में बहुत ही कम रुकता है। इन्हें रोकने की व्यवस्था करनी होगी। नए पर्यटन स्थल विकसित करने होंगे। इनका प्रचार करना पड़ेगा ताकि पर्यटक जम्मू में ठहर सकें। साथ ही पुराने पर्यटन स्थलों को नया रूप देना होगा।
- साहिल गुप्ता, कारोबारी
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40 साल हो गए यहां दुकान करते। बहुत कुछ बदल गया। कारोबार काफी कम हो गया है। पहले पुराने बस स्टैंड वाला पुल खुला रहता था। पर्यटक सीधे ऊपर हरि मार्केट तक आते थे। अब यह पुल भी बंद कर दिया गया है।
- प्रवीण कुमार, कारोबारी
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पहले-पहले सीजन में एक दिन में लगभग 40-50 हजार रुपये के ड्राईफ्रूट की बिक्री हो जाती थी। अब उतना टूरिस्ट आता नहीं है। कमाई भी तीन-चार हजार रुपये प्रति दिन रह गई है। कभी श्री अमरनाथ यात्रा के समय बाजार में दिनभर भीड़ रहती थी। आज खुद देख लें पूरा बाजार खाली है।
- केवल कृष्ण, हरि मार्केट
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। देशभर से जम्मू में आने वाले पर्यटकों से कभी गुलजार रहने वाला मशहूर हरि मार्केट का हाल आज विपरीत हैं। दुकानदारों का कहना है कि अगर पर्यटक जम्मू में रुकेंगे तो ही खरीदारी करेंगे। अब तो टूरिस्ट दिल्ली से ट्रेन पकड़ते हैं और सीधे कटड़ा या श्रीनगर पहुंच जाते हैं। घूमकर वहीं से वापस चले जाते हैं।
हरि मार्केट में ड्राईफ्रूट का कारोबार करने वाले राजेश शर्मा और सतीश गुप्ता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार को जम्मू शहर में पर्यटकों को रोकने का इंतजाम करना होगा। आरएस पुरा के सुचेतगढ़ बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी होती है, उस स्थल को विकसित किया जा सकता है। अमृतसर के अटारी बॉर्डर पर भी रिट्रीट देखने देशभर से लोग पहुंचते हैं। कारोबारियों ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से भी मांग है कि जम्मू को पर्यटन के तौर पर विकसित किया जाए। जम्मू में आखिर कितने पर्यटन स्थल हैं। यहां सैलानी क्यों रुकेंगे। दिल्ली से सीधा कटड़ा और श्रीनगर के लिए वंदे भारत ट्रेन शुरू हो जाने से पर्यटक अब जम्मू में रुकते ही नहीं हैं।
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ड्राईफ्रूट की दुकानें हैं
हरि मार्केट की पहचान
दुकानों के बाहर रखीं अखरोट और बादाम की बोरियां प्राचीन हरि मार्केट की पहचान हैं। इस बाजार में ज्यादातर ड्राईफ्रूट और कढ़ाई वाले शॉल की दुकानें हैं। खिलौने और जूतों की दुकान भी है। स्थानीय कारोबारियों ने बताया कि यह मार्केट 1970 में डॉ. कर्ण सिंह ने बसाई थी।
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32 साल हो गए कारोबार करते। अब व्यापार उतना रह नहीं गया। जम्मू में बहुत ही कम पर्यटक आते हैं। हर दिन किराये की राशि निकालना मुश्किल हो गया है। सरकार को इंतजाम करने चाहिए कि पर्यटक जम्मू में भी रुकें और बाजारों में खरीदारी कर पाएं।
- सुरेश कुमार, शॉल कारोबारी, हरि मार्केट
सरकार को गंभीरता से इस विषय पर सोचना होगा। पर्यटक जम्मू में बहुत ही कम रुकता है। इन्हें रोकने की व्यवस्था करनी होगी। नए पर्यटन स्थल विकसित करने होंगे। इनका प्रचार करना पड़ेगा ताकि पर्यटक जम्मू में ठहर सकें। साथ ही पुराने पर्यटन स्थलों को नया रूप देना होगा।
- साहिल गुप्ता, कारोबारी
40 साल हो गए यहां दुकान करते। बहुत कुछ बदल गया। कारोबार काफी कम हो गया है। पहले पुराने बस स्टैंड वाला पुल खुला रहता था। पर्यटक सीधे ऊपर हरि मार्केट तक आते थे। अब यह पुल भी बंद कर दिया गया है।
- प्रवीण कुमार, कारोबारी
पहले-पहले सीजन में एक दिन में लगभग 40-50 हजार रुपये के ड्राईफ्रूट की बिक्री हो जाती थी। अब उतना टूरिस्ट आता नहीं है। कमाई भी तीन-चार हजार रुपये प्रति दिन रह गई है। कभी श्री अमरनाथ यात्रा के समय बाजार में दिनभर भीड़ रहती थी। आज खुद देख लें पूरा बाजार खाली है।
- केवल कृष्ण, हरि मार्केट