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Jammu News: बिल्डरों ने प्रदूषण मानकों के नोटिस का नहीं दिया जवाब
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- प्रदूषण नियंत्रण समिति ने डीपीआर जमा करने के भी दिए थे निर्देश
जम्मू। इस महीने के प्रथम सप्ताह में ही 22 बिल्डरों के खिलाफ प्रदूषण मानकों का पालन न करने को लेकर नोटिस जारी किए थे। सभी से एक सप्ताह में जवाब देते हुए डीपीआर सहित अन्य जरूरी कागजात जमा करने थे। मगर अभी तक किसी भी बिल्डर की तरफ से प्रदूषण नियंत्रण समिति को जवाब नहीं दिया गया।
नोटिस में ऐसे बिल्डर्स शामिल थे जिनकी ओर से निर्माण 20 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल पर किए जा रहे हैं। इसमें जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से एनओसी मिलने से पहले प्रदूषण मानकों का पालन करना जरूरी होता है। समिति के चेयरमैन वासु यादव ने बताया कि जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीधे नहीं छोड़ा सकता औद्यौगिक इकाइयों का पानी
चेयरमैन वासु यादव ने कहा कि कठुआ में कुछ औद्यौगिक इकाइयों की तरफ से प्रदूषण नियंत्रण के मानक का पालन न करने पर नोटिस जारी किए गए हैं। इन इकाइयों की ओर से प्राथमिक स्तर पर ट्रीटमेंट के बाद पानी को सीधे खेतों में छोड़ा जा रहा था। नियम के तहत इंडस्ट्रियल ट्रीटमेंट प्लांट, फिर दो से तीन बार ट्रीट कर ही पानी आगे छोड़ा जा सकता है। बाढ़ के कारण इकाइयों के ट्रीटमेंट प्लांट में खराबी आ गई थी। इसलिए प्रबंधन को ट्रीटमेंट प्लांट दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए थे।
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जम्मू। इस महीने के प्रथम सप्ताह में ही 22 बिल्डरों के खिलाफ प्रदूषण मानकों का पालन न करने को लेकर नोटिस जारी किए थे। सभी से एक सप्ताह में जवाब देते हुए डीपीआर सहित अन्य जरूरी कागजात जमा करने थे। मगर अभी तक किसी भी बिल्डर की तरफ से प्रदूषण नियंत्रण समिति को जवाब नहीं दिया गया।
नोटिस में ऐसे बिल्डर्स शामिल थे जिनकी ओर से निर्माण 20 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल पर किए जा रहे हैं। इसमें जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से एनओसी मिलने से पहले प्रदूषण मानकों का पालन करना जरूरी होता है। समिति के चेयरमैन वासु यादव ने बताया कि जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सीधे नहीं छोड़ा सकता औद्यौगिक इकाइयों का पानी
चेयरमैन वासु यादव ने कहा कि कठुआ में कुछ औद्यौगिक इकाइयों की तरफ से प्रदूषण नियंत्रण के मानक का पालन न करने पर नोटिस जारी किए गए हैं। इन इकाइयों की ओर से प्राथमिक स्तर पर ट्रीटमेंट के बाद पानी को सीधे खेतों में छोड़ा जा रहा था। नियम के तहत इंडस्ट्रियल ट्रीटमेंट प्लांट, फिर दो से तीन बार ट्रीट कर ही पानी आगे छोड़ा जा सकता है। बाढ़ के कारण इकाइयों के ट्रीटमेंट प्लांट में खराबी आ गई थी। इसलिए प्रबंधन को ट्रीटमेंट प्लांट दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए थे।
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