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गोलाबारी रोकने के लिए भारत- पाकिस्तान के बीच सहमति का स्वागत किया
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कांग्रेस नेता मोहन सिंह चौधरी पत्रकारो को जानकारी देते हुए
- फोटो : RSPURA
आरएस पुरा। अंतरराष्ट्रीय भारत-पाकिस्तान सीमा और एलओसी पर गोलाबारी रोकने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच डीजीएमओ स्तर पर हुई सहमति का कांग्रेस नेता चौधरी मोहन सिंह ने स्वागत किया। आरएस पुरा में शुक्रवार को प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि लंबे अरसे के बाद भारत- पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए जो दोनों देशों ने फैसला लिया है वह स्वागत योग्य है। दोनों देशों को इस फैसले का पालन करने की जरूरत है। ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच जब भी गोलाबारी होती है। तो सबसे ज्यादा नुकसान भारत-पाक सीमा पर रहने वाले लोगों को उठाना पड़ता है। गोलाबारी में बेकसूर लोगों को जान गवानी पड़ती है। इस पहल से दोनों देश में अमन चैन कायम होगा।
उधर सुचेतगढ के सरपंच सर्वण लाल भगत ने कहा कि दोनों देशों के मध्य डीजीएमओ की बातचीत होने के बाद अब गोलाबारी नहीं करने का फैसला किया है। यह दोनों देशों के लिए बेहतर है। किसान आज भी जीरो लाइन तक खेतीबाड़ी कर रहे हैं। इस तरह के फैसले से वे काफी खुशहाली महसूस करेंगे। गांव चंदू चक्क के चौ. कृष्ण लाल ने कहा कि दो वर्ष से आरएस पुरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर कोई गोलाबारी नहीं की गई, जिसके चलते अब पहले से हालत बेहतर हैं। दोनों देशों के मध्य अगर अंतरराष्ट्रीय सीमा व एलओसी पर शांति स्थापित करने का फैसला किया है तो वह सीमावर्ती ग्रामीणों के लिए बेहतर है।
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गांव सुचेतगढ़ के बुजुर्ग हवेली राम का कहना है कि आजादी के बाद पाकिस्तान से जंग भी हुई लेकिन पाकिस्तान की कथनी व करनी में काफी अंतर है। सीमा के अंतिम छोर तक किसान खेतीबाड़ी करने के लिए समय तय होने पर जाते हैं। पाकिस्तान क्षेत्र के किसानों का कोई समय नहीं है। पहले पाकिस्तान क्षेत्र में पाकिस्तानी रेंजर्स दिखाई देते थे। अब नहीं, लेकिन पाकिस्तान के किसान जरूर खेतीबाड़ी करते हुए देखे जाते हैं।
गांव अब्दुल्लियां के पूर्व सरपंच चौ. बचन लाल का कहना है कि गोलाबारी से कुछ हासिल नहीं होता। दोनों देशों के लोगों को जाने गंवाने के साथ आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ता है। दोनों देशों के मध्य डीजीएमओ स्तर की वार्ता अहम बताया लेकिन आने वाले समय पर ही इसका जवाब मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच जब भी गोलाबारी होती है। तो सबसे ज्यादा नुकसान भारत-पाक सीमा पर रहने वाले लोगों को उठाना पड़ता है। गोलाबारी में बेकसूर लोगों को जान गवानी पड़ती है। इस पहल से दोनों देश में अमन चैन कायम होगा।
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उधर सुचेतगढ के सरपंच सर्वण लाल भगत ने कहा कि दोनों देशों के मध्य डीजीएमओ की बातचीत होने के बाद अब गोलाबारी नहीं करने का फैसला किया है। यह दोनों देशों के लिए बेहतर है। किसान आज भी जीरो लाइन तक खेतीबाड़ी कर रहे हैं। इस तरह के फैसले से वे काफी खुशहाली महसूस करेंगे। गांव चंदू चक्क के चौ. कृष्ण लाल ने कहा कि दो वर्ष से आरएस पुरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर कोई गोलाबारी नहीं की गई, जिसके चलते अब पहले से हालत बेहतर हैं। दोनों देशों के मध्य अगर अंतरराष्ट्रीय सीमा व एलओसी पर शांति स्थापित करने का फैसला किया है तो वह सीमावर्ती ग्रामीणों के लिए बेहतर है।
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गांव सुचेतगढ़ के बुजुर्ग हवेली राम का कहना है कि आजादी के बाद पाकिस्तान से जंग भी हुई लेकिन पाकिस्तान की कथनी व करनी में काफी अंतर है। सीमा के अंतिम छोर तक किसान खेतीबाड़ी करने के लिए समय तय होने पर जाते हैं। पाकिस्तान क्षेत्र के किसानों का कोई समय नहीं है। पहले पाकिस्तान क्षेत्र में पाकिस्तानी रेंजर्स दिखाई देते थे। अब नहीं, लेकिन पाकिस्तान के किसान जरूर खेतीबाड़ी करते हुए देखे जाते हैं।
गांव अब्दुल्लियां के पूर्व सरपंच चौ. बचन लाल का कहना है कि गोलाबारी से कुछ हासिल नहीं होता। दोनों देशों के लोगों को जाने गंवाने के साथ आर्थिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ता है। दोनों देशों के मध्य डीजीएमओ स्तर की वार्ता अहम बताया लेकिन आने वाले समय पर ही इसका जवाब मिलेगा।