पलटी भाजपा, विधायक लगाएंगे रियासत का झंडा
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चाल, चेहरा और चरित्र वाली भाजपा को रियासत में पीडीपी के साथ सरकार बनाने के बाद आए दिन किसी न किसी नयी नसीहत से साबका पड़ रहा है। लंबे अरसे से एक निशान एक विधान का नारा बुलंद करने वाली भाजपा के वे सभी नेता अब अपने सरकारी वाहनों पर दो झंडे लगाए नजर आएंगे जो राज्य सरकार में मंत्री हैं या अन्य किसी संवैधानिक पद पर हैं।
ऐसा करना उनके लिए अपरिहार्य होगा। राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग आयुक्त/सचिव एमए बुखारी ने इस बाबत वीरवार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि रियासत में यह सामान्य परंपरा है और सभी संबंधित व्यक्ति इसका पालन करते रहे हैं।
माना जा रहा है कि यह निर्देश खास तौर से भाजपा से संबंधित मंत्री और अन्य प्राधिकारियों के मद्देनजर जारी किया गया है। इस बाबत पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं से बात की गई तो अनौपचारिक रूप से उनका कहना था कि गठबंधन धर्म को निभाने के लिए ऐसा करने में कुछ भी गलत नहीं है।
उनका तर्क था कि जब शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री को दो झंडों पर कोई आपत्ति नहीं थी तो हमें क्यों होगी।
भारतीय झंडे की तरह पवित्र है रियासत का झंडा
वीरवार को होस्टिंग ऑफ स्टेट फ्लैग विषय से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के संविधान और 1952 में हुए दिल्ली समझौते के अनुसार रियासती झंडे की वही पवित्रता और वैधानिक स्थान है, जो भारतीय संविधान में राष्ट्रीय ध्वज का है। इसलिए इसकी पवित्रता और सम्मान हर हाल में किसी भी कीमत पर बनाए रखनी होगी।
राष्ट्रीय ध्वज के साथ संयुक्त रूप से रियासती झंडे को न फहराना जम्मू-कश्मीर प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू स्टेट ऑनर्स एक्ट , 1979 के तहत रियासत के झंडे का अपमान माना जाएगा। आदेश में सभी संवैधानिक प्राधिकारी राष्ट्रीय झंडे की तरह हर कीमत पर रियासती झंडे की पवित्रता और सम्मान को बनाए रखें।
रियासती झंडा संयुक्त रूप से इमारतों, आवासों और संवैधानिक संस्थानों पर फहराया जाए। साथ ही संवैधानिक प्राधिकारी की सरकारी कार पर भी फहराया जाए। इस संबंध में किसी तरह का उल्लंघन रियासती झंडे का अपमान और संबंधित कानून का उल्लंघन होगा।