जम्मू-कश्मीर में बर्ड फ्लू का अलर्ट जारी, पक्षियों की सैंपल जांच शुरू
- हिमाचल में बर्ड फ्लू से पक्षियों की मौत के बाद लखनपुर में भी सख्ती
- पोल्ट्री वाहनों को जांच के बाद ही दिया जा रहा प्रवेश, प्रवासी पक्षियों पर रखी जा रही नजर
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हिमाचल में 17 सौ के लगभग प्रवासी पक्षियों की बर्ड फ्लू से मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। हिमाचल से सटे जम्मू संभाग के अभयारण्यों और वेटलैंड समेत पूरे प्रदेश में विभागीय अमला बर्ड वॉचर और पंचायत सदस्यों की मदद से पक्षियों की कड़ी निगरानी में जुट गया है। जम्मू के घराना वेटलैंड से मंगलवार को 25 प्रवासी पक्षियों के सैंपल लेकर जांच को भेजे गए हैं। वहीं, लखनपुर में पोल्ट्री वाहनों को जांच के बाद ही प्रवेश देने के आदेश हो गए हैं। इसी तरह से रंजीत सागर बांध, मानसर, सुरुईंसर, परगवाल के अलावा कश्मीर की डल, वुल्लर झील समेत सभी बड़े जलाशयों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
रंजीत सागर झील, बनी और जसरोटा वन्यजीव अभयारण्य चूंकि हिमाचल की सरहद के करीब हैं। ऐसे में इन जगहों पर प्रवासी पक्षियों पर खास नजर रखी जा रही है। केंद्रीय एडवाइजरी में वाइल्ड लाइफ डिवीजनों को एवियन इंफ्लूएंजा के लक्षणों और इस दौरान बरती जानी वाली सावधानियों की जानकारी दी गई है।
यह है एडवाइजरी
एडवाइजरी में बताया गया है कि प्रभावित पक्षी इस बीमारी में दौरे पड़ने, हैजा, सिर मुड़ना और पैरालिसिस जैसे लक्षण दर्शाते हैं। बीमारी तेजी से फैलती है, जिससे लकवा और लड़खड़ाहट होती है। प्रभावित पोल्ट्री से यह फ्लू जंगली पक्षियों और फिर जंगली पक्षियों से पोल्ट्री में भी फैल सकता है। सभी जंगली पक्षियों के नमूने मूल्यवान हैं। ऐसे में नमूने एकत्रित करने, पैकिंग और परिवहन को प्रशिक्षित पशुपालन/पशु चिकित्सा कर्मचारियों के सहयोग से किया जाना चाहिए। केवल संरक्षित स्थानों ही नहीं, बैक यार्ड पोल्ट्री पर भी नजर रखी जाए। सभी प्रदेश और राज्य आपात योजना तैयार करने और प्रदेश स्तरीय कमेटियों की निगरानी तत्काल शुरू करें।
कम स्टाफ से निगरानी में चुनौती
हिमाचल में बड़े पैमाने पर प्रवासी पक्षियों की मौत के बाद हिमाचल से सटे जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों पर सबसे अधिक निगरानी रखने का अलर्ट जारी किया गया है। रंजीत सागर झील में इस साल पहली बार बड़ी संख्या में जहां प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाला है, वहीं बनी वन्यजीव अभयारण्य और चंबा जिले के संरक्षित इलाकों में प्रवासी पक्षी और जानवर आना जाना करते रहते हैं। चिंताजनक बात है कि यहां विभाग के पास सीमित स्टाफ है। आबादी वाले क्षेत्रों में पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की निगरानी रखने में मदद लेने को कहा गया है।
वर्तमान में पोल्ट्री के चार-पांच वाहन आ रहे
पशुपालन निदेशालय ने लखनपुर रिंडरपेस्ट चेक पोस्ट पर पोल्ट्री से जुड़े वाहनों को सैंपलिंग शुरू कर दी है। लखनपुर की आरपी चेकपोस्ट में लोकल सैंपल के अतिरिक्त एक सैंपल जम्मू में जांच के लिए भेजा जाता है। हालांकि इसकी जांच रिपोर्ट पहुंचने में एक सप्ताह से भी अधिक का समय लग जाता है। बावजूद इसके एहतियात बरतते हुए लखनपुर में मरे हुई पोल्ट्री पाए जाने पर वाहनों को प्रदेश में दाखिल न होने देने के निर्देश दिए गए हैं। रिंडरपेस्ट चेकपोस्ट में तैनात सहायक वेटरनेरी सर्जन डॉ. रामपाल भगत ने बताया कि निदेशालय के निर्देश के बाद सतर्कता बढ़ा दिए गए हैं। फिलहाल जम्मू श्रीनगर हाईवे बंद होने से चार से पांच वाहन ही प्रदेश में दाखिल हो रहे हैं।
घराना में 170 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी
वन्यजीव विभाग के अधिकारी डॉ. रंजीत कटोत ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे घराना वेटलैंड को 1981 में अधिसूचित किया गया था। यहां 170 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं। वर्तमान में वेटलैंड में एक से दो हजार की औसत से पक्षी मौजूद रहते हैं। इनमें बार हेडेड गीस, गडवाल, कामन टील्स, पर्पल स्वांप मुर्गियां, भारतीय मूर मुर्गियां आदि हैं। यहां हर साल मध्य एशिया से हजारों प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। डॉ. कटोच ने बताया कि पशु पालन विभाग की टीम नमूनों को जांच के लिए उन्हें जालंधर भेजेगी।
अभी तक कोई मामला नहीं
वन्यजीव संरक्षण विभाग के चीफ वार्डन सुरेश गुप्ता ने कहा कि अभी तक जम्मू-कश्मीर में फ्लू के कारण किसी पक्षी की मौत की सूचना नहीं है। अमूमन दुनिया भर से आने वाले प्रवासी पक्षी दिसंबर के मध्य तक समूह में संबंधित स्थानों पर पहुंच जाते हैं। जम्मू-कश्मीर में भी लगभग प्रवासी पक्षी पहुंच चुके हैं। ऐसे में उनमें फ्लू के लक्षण मिलने की आशंका कम है, हालांकि पूरे फील्ड स्टाफ को वेटलैंड क्षेत्रों में पक्षियों की निगरानी के लिए लगाया गया है।