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सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बिहार का राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान : एलजी
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कार्यक्रम को संबोधित करते एलजी मनोज सिन्हा
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- राजभवन में मनाया गया बिहार दिवस, एलजी मनोज सिन्हा ने दी बधाई
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजभवन में शनिवार को बिहार दिवस के अवसर पर एक समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सभी को शुभकामनाएं दी। इस दौरान छात्राओं के एक समूह की ओर से सांस्कृतिक नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। समारोह में वरिष्ठ अधिकारी, शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख, विद्यार्थी और प्रदेश में रहने वाले बिहार के निवासी भी शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि प्राचीन काल से ही बिहार अपने समृद्ध इतिहास, जीवंत संस्कृति और आध्यात्मिकता के जाना जाता है। शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान, साहित्य, उद्यम से लेकर अध्यात्म तक शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जहां बिहार के लोगों ने अपनी छाप न छोड़ी हो। आजादी के दौरान भी बिहार उद्योगों के लिए मुफीद सबसे बेहतर जगहों में से एक था। बाबा बैजनाथ धाम, गया, विष्णुपद मंदिर, जानकी मंदिर, बोधगया, तख्त श्री हरिमंदिर साहिब जी, कुंडग्राम, पावापुरी जैसे अनेक पवित्र स्थलों का एक ही राज्य में होना अपने आप में किसी दैवीय वरदान से कम नहीं है। प्राचीन काल में बिहार उच्च शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था। नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय में दुनिया भर से छात्र अध्ययन करने आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को दुनिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय माना जाता था, जिसे बख्तियार खिलजी ने नष्ट कर दिया था।
एलजी ने आगे कहा कि दशकों से, बिहार ने बड़ी संख्या में आईएएस, आईपीएस और अन्य अधिकारियों को तैयार करने की गौरवशाली परंपरा को बनाए रखा है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया है। 21वीं सदी में बिहार एक बार फिर से जीवंत हो गया है। मुझे उम्मीद है कि बिहार के लोग विकसित बिहार और विकसित भारत के लिए समर्पित रूप से काम करना जारी रखेंगे। इसके साथ ही एलजी ने बिहार की दिवंगत महान हस्तियों को श्रद्धांजलि भी दी।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजभवन में शनिवार को बिहार दिवस के अवसर पर एक समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सभी को शुभकामनाएं दी। इस दौरान छात्राओं के एक समूह की ओर से सांस्कृतिक नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। समारोह में वरिष्ठ अधिकारी, शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख, विद्यार्थी और प्रदेश में रहने वाले बिहार के निवासी भी शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि प्राचीन काल से ही बिहार अपने समृद्ध इतिहास, जीवंत संस्कृति और आध्यात्मिकता के जाना जाता है। शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान, साहित्य, उद्यम से लेकर अध्यात्म तक शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जहां बिहार के लोगों ने अपनी छाप न छोड़ी हो। आजादी के दौरान भी बिहार उद्योगों के लिए मुफीद सबसे बेहतर जगहों में से एक था। बाबा बैजनाथ धाम, गया, विष्णुपद मंदिर, जानकी मंदिर, बोधगया, तख्त श्री हरिमंदिर साहिब जी, कुंडग्राम, पावापुरी जैसे अनेक पवित्र स्थलों का एक ही राज्य में होना अपने आप में किसी दैवीय वरदान से कम नहीं है। प्राचीन काल में बिहार उच्च शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था। नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय में दुनिया भर से छात्र अध्ययन करने आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को दुनिया का सबसे बड़ा पुस्तकालय माना जाता था, जिसे बख्तियार खिलजी ने नष्ट कर दिया था।
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एलजी ने आगे कहा कि दशकों से, बिहार ने बड़ी संख्या में आईएएस, आईपीएस और अन्य अधिकारियों को तैयार करने की गौरवशाली परंपरा को बनाए रखा है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया है। 21वीं सदी में बिहार एक बार फिर से जीवंत हो गया है। मुझे उम्मीद है कि बिहार के लोग विकसित बिहार और विकसित भारत के लिए समर्पित रूप से काम करना जारी रखेंगे। इसके साथ ही एलजी ने बिहार की दिवंगत महान हस्तियों को श्रद्धांजलि भी दी।
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