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कश्मीर हिंसा के कारण घाटी के पर्यटन को हुआ ये बड़ा नुकसान

Sat, 03 Dec 2016 02:44 PM IST
ओमपाल संब्याल, अमर उजाला/जम्मू
ओमपाल संब्याल, अमर उजाला/जम्मू Updated Sat, 03 Dec 2016 02:44 PM IST
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big loss occured to kashmir tourism due to unrest in kashmir valley
Kashmir Tourism - फोटो : File Photo

सर्दियों का टूरिस्ट सीजन सिर पर है, लेकिन, सैलानियों की खिदमत के इंतजाम नदारद हैं। रियासत के पहलगाम सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटन विभाग की संपत्तियों (होटल, रेस्टोरेंट, क्लब, हट) की आउट सोर्सिंग अटकी पड़ी है।

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आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद बने बिगड़े हालात से आउट सोर्सिंग की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है।यहां तक कि जिन लोगों के पास आउट सोर्सिंग का कांट्रैक्ट था, वे भी पर्यटन विभाग की संपत्ति को संभालने से किनारा कर चुके हैं। ऐसे हालात में पर्यटन विभाग रियायतों से लोगों को रिझाने की कोशिश में है।
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सर्दियों में बर्फबारी और गर्मियों के सीजन में घास गलीचों के मैदान व देवदार के जंगलों से घिरे विहंगम पर्यटक स्थलों पर पर्यटन विभाग की संपत्तियां हैं। राज्य की 42 लोकेशन पर लगभग 90 संपत्तियां हैं जिनका संचालन जम्मू-कश्मीर टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन (जेकेटीडीसी) करता है। इनमें से 21 संपत्तियां पर्यटकों की पसंदीदा मानी जाती हैं। 

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कश्मीर में हालात खराब होने से नहीं हो पा रही आउट सोर्सिंग

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kashmir - फोटो : PTI

इन्हें निगम हर साल आउट सोर्स किया जाता है। निजी प्रबंधन के हाथों में जाने से इन संपत्तियों में सेवा सुधार होता है। पहलगाम के एक प्रमुख क्लब के लिए निगम ने मई 2015 में टेंडर किया था। कई अन्य स्थानों पर भी प्रक्रिया चलाई गई। लेकिन, जुलाई में हिंसा भड़कने से सारी प्रक्रिया चौपट हो गई। 

जेकेटीडीसी के प्रबंध निदेशक डॉ. शाहिद इकबाल के अनुसार कश्मीर में हालात खराब होने से आउट सोर्सिंग नहीं हो पा रही है। टूरिस्ट सीजन को ध्यान में रखते हुए निगम अब नई रियायतों से निजी संचालकों को आकर्षित करेगा। पूर्ववर्ती व्यवस्था के तहत पूरे साल की राशि एडवांस में ली जाती थी।

इसकी अवधि घटाकर अब तीन महीने की जा रही है। इसके अलावा घाटी में हालात खराब होने की सूरत में निजी संचालकों को एक्जिट विंडो (काम छोड़ना) का विकल्प भी दिया जाएगा, ताकि उन्हें नुकसान न उठाना पड़े।

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