अनंतनाग लोकसभा सीट पर टल गया उपचुनाव, चुनाव आयोग का फैसला
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अनंतनाग लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव टलना तय हो गया है। चुनाव आयोग की फुल बेंच बैठक में चुनाव टालने का फैसला किया गया है। अब यह फाइल कानून मंत्रालय के पास भेजी गई है। उम्मीद है अगले सप्ताह चुनाव टलने की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद से यह सीट खाली हुई थी।
छह महीने के भीतर चुनाव कराने की बाध्यता की वजह से जनवरी के पहले सप्ताह तक चुनाव करा लिया जाना अनिवार्य है। इस अवधि के बाद चुनाव के लिए अलग से अधिसूचना जारी करनी होगी। सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग ने शुक्रवार को हुई बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) की ओर से चुनाव के बाबत भेजी गई रिपोर्ट पर विचार किया।
रिपोर्ट में विभिन्न दलों की चुनाव संबंधी राय के साथ ही घाटी में कानून व्यवस्था के हालात का जिक्र था। बैठक में चुनाव कराने की स्थिति में मतदाताओं की सुरक्षा, वोटिंग प्रतिशत तथा अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बात उभरकर सामने आई कि मौजूदा स्थितियों में चुनाव कराए जाने से मतदान पर असर पड़ सकता है।
श्रीनगर सीट पर भी साथ चुनाव होना संभव
वोटिंग प्रतिशत कम होने के साथ ही कुछ स्थानों पर बहिष्कार की स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है। इन सारे मुद्दों पर चर्चा के बाद चुनाव टालने का फैसला किया गया। कारण दिसंबर महीने में बर्फबारी शुरू होने के बाद चुनाव करा पाना संभव नहीं है। साथ ही तारिक हमीद कर्रा के इस्तीफे के बाद श्रीनगर की खाली हुई सीट पर भी साथ ही चुनाव कराया जा सकेगा।
बैठक में यह राय बनी कि मार्च के बाद दोनों सीटों के लिए एक साथ चुनाव कराए जाएं। सीईओ शांतमनु ने बताया कि चुनाव आयोग ने उपचुनाव पर विचार कर लिया है। उम्मीद है कि अगले एक सप्ताह में तस्वीर साफ हो जाएगी।
ज्ञात हो कि पिछले महीने राज्य सरकार की ओर से चुनाव आयोग को पत्र भेजकर चुनाव टालने का आग्रह किया गया था। इसमें कानून व्यवस्था तथा घाटी की हिंसा का हवाला दिया गया था। इसके बाद ही आयोग ने सीईओ को सभी दलों की राय लेकर रिपोर्ट भेजने को कहा था।
पीडीपी टालने और विपक्ष चुनाव के पक्ष में
चुनाव कराए जाने को लेकर सीईओ की ओर से राजनीतिक दलों की बुलाई गई बैठक में पीडीपी ने चुनाव टालने की वकालत की थी। पार्टी का कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव कराया जाना उचित नहीं होगा।
इस वजह से अप्रैल तक चुनाव टाल दिए जाएं। सरकार में सहयोगी भाजपा बैठक में शामिल नहीं हुई, जबकि विपक्षी दल नेकां, कांग्रेस, पैंथर्स ने जल्द चुनाव कराने को कहा। उनका कहना था कि उनकी पार्टियां चुनाव के लिए तैयार हैं। जब घाटी में परीक्षाएं हो सकती हैं तो फिर चुनाव क्यों नही