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100 साल से अधिक पुराना है जम्मू का यह नाग देवता मंदिर, तालाब में नहाने से मिलती है कई रोगों से मुक्ति
Thu, 15 Apr 2021 04:27 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Thu, 15 Apr 2021 04:27 PM IST
सार
यह मेला महाराजा हरि सिंह ने अपने बेटे करण सिंह के जन्म पर लगाना शुरू किया था। यह स्थान नाग देवता के नाम से भी जाना जाता है।
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नागबनी स्थित नाग मंदिर में महाराजा हरि सिंह ने मेले लगाने की शुरुआत की थी
विस्तार
रायपुर दोमाना विधानसभा क्षेत्र के नागबनी में पिछले 90 वर्षों से बैसाखी के दूसरे दिन लगने वाला मेला कोरोना महामारी के चलते इस बार भी नहीं लग पाया। यह मेला महाराजा हरि सिंह ने अपने बेटे करण सिंह के जन्म पर लगाना शुरू किया था। यह स्थान नाग देवता के नाम से भी जाना जाता है।
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नाग देवता मंदिर के पुजारी साहिल खजूरिया ने बताया कि ये प्राचीन मंदिर 100 वर्ष से भी अधिक पुराना है। यहां एक तालाब भी है। इस तालाब के पानी की बड़ी मान्यता है। इसमें नहाने से कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पर माथा टेकने और मन्नतें मांगते हैं।
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मंदिर में दीपक पाण्डेय, दविंद्र खजूरिया और संजय शर्मा ने बताया कि महाराजा हरि सिंह ने इस स्थान पर बैसाखी के दूसरे दिन मेला आरंभ करवाया था। मेले में आसपास के गांवों के लोग भांगड़ा, गिद्दा, डोगरी संगीत, डोगरी नृत्य करते थे और यहां पर घोड़ों की रेस, दंगल होते थे।
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अनाज की मंडियां व अन्य वस्तुओं की प्रदर्शनी लगती थी, लेकिन महाराजा हरि सिंह के गुजर जाने के बाद यह मेला धीरे-धीरे विलुप्त होता चला गया। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मेले को झिड़ी मेले की तर्ज पर लगाना चाहिए, ताकि आज का युवा वर्ग अपनी प्राचीन डोगरी सभ्यता और संस्कृति से जुड़ा रहे।
उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने जमीन का बहुत बड़ा भाग मंदिर के नाम किया था, लेकिन धीरे-धीरे अतिक्रमण से जगह कम होती जा रही है। नाग देवता मंदिर की तरफ जा रहे रास्तों का भी निर्माण किया जाए।